कानपुर. अधिवक्ता राजाराम वर्मा हत्याकांड में न्याय की मांग कर रहे उनके बेटे नरेंद्र देव वर्मा ने मामले की जांच CBI को सौंपने की कवायद पर कड़ा ऐतराज जताया है। शनिवार को सिविल लाइंस स्थित एक रेस्टोरेंट में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान नरेंद्र ने आरोप लगाया कि शहर के कद्दावर नेताओं (सांसद-विधायकों) के दबाव में जांच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
“ईमानदार अधिकारी का तबादला साजिश का हिस्सा”
नरेंद्र देव ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि संयुक्त पुलिस आयुक्त (JCP) विनोद कुमार सिंह इस मामले की निष्पक्ष जांच कर रहे थे। उन्होंने ही हत्याकांड की कड़ियों को जोड़ते हुए बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री राकेश तिवारी की भूमिका को स्पष्ट किया था। नरेंद्र का दावा है कि जैसे ही जांच की आंच रसूखदारों तक पहुंची, राजनीतिक दबाव बनाकर JCP का तबादला करा दिया गया।
जमीन के सौदे से खुला ‘पर्दे के पीछे’ का खेल
प्रेस वार्ता में नरेंद्र ने वित्तीय लेनदेन के कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी साझा किए। उन्होंने बताया कि:
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20 अप्रैल 2022: राकेश तिवारी ने उनके छोटे भाई शिवाजी की पत्नी रेखा वर्मा को 11 लाख रुपये RTGS के जरिए दिए।
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26 अप्रैल 2022: पुन: 10 लाख रुपये NEFT के माध्यम से ट्रांसफर किए गए।
नरेंद्र के अनुसार, “शुरुआत में राकेश तिवारी की भूमिका संदिग्ध नहीं लग रही थी, लेकिन जमीन की खरीद-फरोख्त के इन पुख्ता सबूतों ने साफ कर दिया कि हत्या के पीछे जमीन का बड़ा विवाद और करोड़ों का हित छिपा है।”
जांच एजेंसियों के बीच खींचतान
मामले की गंभीरता को देखते हुए 19 नवंबर 2025 को तत्कालीन पुलिस आयुक्त अखिल कुमार ने जांच JCP विनोद सिंह को सौंपी थी। JCP ने कड़ा रुख अपनाते हुए राकेश तिवारी को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। इसके बाद ही जांच का जिम्मा मूलगंज थाने से हटाकर कोतवाली प्रभारी जगदीश प्रसाद पांडेय को सौंप दिया गया।
अब तक की जांच में पुलिस ने:
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हत्यारोपियों से पूछताछ की है।
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जमीन का एग्रीमेंट कराने वाले बिचौलियों को तलब किया।
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NRI सिटी के निदेशकों से भी लंबी पूछताछ की है।
CBI जांच: न्याय या देरी की रणनीति?
दिलचस्प मोड़ तब आया जब आरोपी राकेश तिवारी की पत्नी ने ही खुद पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए मामले को CBI को सौंपने की मांग की। शहर के दोनों सांसदों ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए शासन को पत्र लिखे हैं। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जब पुलिस की जांच में NRI सिटी के निदेशकों और राकेश तिवारी के बीच का ‘गठबंधन’ उजागर होने लगा, तब खुद को बचाने के लिए CBI जांच का सहारा लिया जा रहा है ताकि मामले को लंबा खींचकर ठंडे बस्ते में डाला जा सके।
पीड़ित का पक्ष: “हम सिर्फ निष्पक्ष न्याय चाहते हैं। पुलिस ने जो साक्ष्य जुटाए हैं, उन्हें दबाने के लिए तबादलों और ऊंची पहुंच का इस्तेमाल किया जा रहा है।” — नरेंद्र देव वर्मा
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