वॉशिंगटन. अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के भीतर एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। व्हाइट हाउस के धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (Advisor Board) में सेवा दे रहीं एकमात्र मुस्लिम महिला सदस्य समीराह मुंशी ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है। मुंशी का यह फैसला न केवल प्रशासन के भीतर वैचारिक मतभेदों को उजागर करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की विदेश नीति पर भी सवाल खड़े करता है।
इस्तीफे की मुख्य वजह: “अन्याय और अत्याचार” का आरोप
समीराह मुंशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपना आधिकारिक बयान जारी करते हुए ट्रंप प्रशासन की कड़ी आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वह प्रशासन की नीतियों, विशेषकर मध्य पूर्व और ईरान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई से बेहद व्यथित हैं।
मुंशी के अनुसार, प्रशासन ने ईरान के खिलाफ सैन्य कदम उठाते समय अमेरिकी संविधान और कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी की अनदेखी की है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन बताया।
आम नागरिकों और बच्चों की मौतों पर जताई चिंता
अपने बयान में मुंशी ने केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि मानवीय आधार पर भी प्रशासन को घेरा। उन्होंने रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा:
“सैन्य हमलों में बेगुनाह आम नागरिकों, विशेषकर बच्चों की मौतें अस्वीकार्य हैं। मैं ऐसे प्रशासन का हिस्सा नहीं बनी रह सकती जो विदेशों में ‘अन्याय और अत्याचार’ को बढ़ावा दे रहा हो।”
इसके अलावा, उन्होंने इजरायल के प्रति प्रशासन के ‘एकतरफा’ समर्थन को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की, जो उनके इस्तीफे का एक बड़ा कारण बना।
आंतरिक कलह: कैरी प्रीजीन बोलर का विवाद
खबरों की मानें तो यह इस्तीफा केवल विदेश नीति तक सीमित नहीं था। आयोग के भीतर हाल ही में कैरी प्रीजीन बोलर (Carrie Prejean Boller) को हटाए जाने के फैसले ने आग में घी डालने का काम किया। इस निष्कासन के बाद आयोग के भीतर तनाव चरम पर था, जिसे मुंशी के इस्तीफे के साथ जोड़कर देखा जा रहा है।
समीराह मुंशी का कार्यकाल और नियुक्ति
समीराह मुंशी को मई 2025 में ट्रंप प्रशासन द्वारा व्हाइट हाउस धार्मिक स्वतंत्रता आयोग के सलाहकार बोर्ड में नियुक्त किया गया था। वह इस बोर्ड में मुस्लिम समुदाय की एकमात्र प्रतिनिधि थीं। उनका इस्तीफा देना प्रशासन के लिए ‘मुस्लिम आउटरीच’ के मोर्चे पर एक बड़ी कूटनीतिक विफलता माना जा रहा है।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| नाम | समीराह मुंशी |
| पद | सदस्य, धार्मिक स्वतंत्रता सलाहकार बोर्ड |
| नियुक्ति | मई 2025 |
| विरोध का केंद्र | ईरान पर सैन्य हमले, नागरिक मौतें, इजरायल नीति |
आगे की राह और प्रभाव
मुंशी ने साफ किया कि उन पर किसी बाहरी समूह या हित का दबाव नहीं है, बल्कि यह उनका नैतिक फैसला है। उनके इस कदम के बाद अब व्हाइट हाउस पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व और विदेश नीति में पारदर्शिता को लेकर दबाव बढ़ना तय है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप प्रशासन इस रिक्ति को कैसे भरता है और अपने ऊपर लगे आरोपों का क्या जवाब देता है।
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