देहरादून । गुरुवार, 14 मई 2026
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) के ऐतिहासिक क्रियान्वयन के बाद, ‘निकाह हलाला’ से जुड़ा राज्य का पहला बड़ा मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के निर्णायक चरण में है। हरिद्वार जिले के बुग्गावाला क्षेत्र की एक पीड़िता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अपनी जांच पूरी कर ली है और न्यायालय में आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल कर दिया है।
यह मामला न केवल कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह UCC के तहत महिलाओं को मिलने वाली सुरक्षा का एक व्यावहारिक उदाहरण भी पेश करता है।
⚖️ मामले की पृष्ठभूमि: विरोध करने पर घर से निकाला
पीड़िता के अनुसार, विवाद की शुरुआत तब हुई जब उसके ससुराल वालों ने उस पर ‘हलाला’ की कुप्रथा को अपनाने के लिए दबाव डाला। पीड़िता ने इसका कड़ा विरोध किया, जिसके परिणामस्वरूप उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर घर से बाहर निकाल दिया गया।
प्रमुख घटनाएं:
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4 अप्रैल 2026: पीड़िता ने हरिद्वार के बुग्गावाला थाने में अपने पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
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आरोप: दहेज उत्पीड़न, मारपीट और मुस्लिम विवाह कानून के साथ-साथ नव-लागू UCC की धाराओं का उल्लंघन।
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जांच: उपनिरीक्षक मनोज कुमार ने साक्ष्य जुटाए, जिसमें मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान मुख्य आधार बने।
📋 चार्जशीट और आरोपी
देहरादून के एसपी ग्रामीण, शेखर चंद्र सुयाल ने पुष्टि की है कि पुलिस ने तय समय सीमा के भीतर जांच पूरी कर न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय, रुड़की की अदालत में आरोप पत्र पेश कर दिया है।
आरोपियों की सूची:
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मुख्य आरोपी: मोहम्मद दानिश (पति)
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अन्य: सईद (ससुर), गुलशाना (सास), अरशद, परवेज, जावेद (देवर/जेठ), सलमा और फैजान।
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जांच के दौरान सामने आया नया नाम: रहमान (देहरादून निवासी)।
नोट: पुलिस ने स्पष्ट किया कि वर्तमान धाराओं के तहत तत्काल गिरफ्तारी का अनिवार्य प्रावधान नहीं था, इसलिए आरोपियों को नोटिस देकर जांच में शामिल किया गया। अब सजा का निर्धारण अदालत द्वारा किया जाएगा।
🛡️ UCC की धारा 32 का प्रभाव
इस मामले में पुलिस को UCC की धारा 32(1)(ii) और 32(1)(iii) के उल्लंघन के पुख्ता सबूत मिले हैं। ये धाराएं विशेष रूप से उन प्रथाओं को प्रतिबंधित करती हैं जो महिलाओं की गरिमा के विरुद्ध हैं और विवाह विच्छेद के बाद पुनर्विवाह के लिए किसी भी अपमानजनक शर्त (जैसे हलाला) को अपराध मानती हैं।
📈 उत्तराखंड में UCC के 1.5 साल: एक नजर
उत्तराखंड में UCC लागू हुए लगभग डेढ़ साल बीत चुके हैं। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, इस कानून ने राज्य में विवाह और तलाक के पंजीकरण में पारदर्शिता लाई है:
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पंजीकरण में उछाल: वर्तमान में राज्य में प्रतिदिन औसतन 1400 विवाह पंजीकरण हो रहे हैं।
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कानूनी सुरक्षा: हलाला और बहुविवाह जैसे मामलों में यह पहली बड़ी कानूनी कार्रवाई है, जो अन्य पीड़ितों के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर उभरी है।
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