मुंबई | गुरुवार, 14 मई 2026
हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों (मई 2026) में बीजेपी की जीत का समर्थन करने और ममता बनर्जी के शासन पर टिप्पणी करने के बाद चर्चा में रहीं देवोलीना भट्टाचार्जी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उनकी चर्चा का कारण राजनीतिक नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय मानवीय त्रासदी पर उनकी संवेदनात्मक और उग्र प्रतिक्रिया है।
क्या है पूरा मामला?
नाइजीरिया से एक विचलित कर देने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें मुस्लिम कट्टरपंथी आतंकवादियों द्वारा एक ईसाई गांव (Ngbra-Zongo) पर किए गए हमले का विवरण है। इस हमले की क्रूरता ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है।
घटना की मुख्य बातें:
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हमले का समय: 8 मई 2026 की रात।
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निशाना: निहत्थे ईसाई परिवार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं।
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बर्बरता का चरम: रिपोर्ट के अनुसार, आतंकियों ने गर्भवती महिलाओं के पेट को कुल्हाड़ियों से चीर दिया और उन्हें अपने बच्चों की मौत का गवाह बनने पर मजबूर किया।
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हताहत: कम से कम 11 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई गंभीर रूप से घायल हैं।
देवोलीना भट्टाचार्जी की तीखी प्रतिक्रिया
देवोलीना ने इस घटना से जुड़ा वीडियो साझा करते हुए लिखा, “एकदम राक्षस और शैतान वाली प्रवृत्ति। इन राक्षसों के लिए नरक में खास जगह है, जिसे वे स्वर्ग समझते हैं।” उनकी यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जहाँ लोग आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर अपनी नाराजगी जता रहे हैं।
नाइजीरिया: 2026 में आतंकवाद का बढ़ता ग्राफ
नाइजीरिया के मध्य बेल्ट (Middle Belt) में ईसाई कृषि समुदायों पर हमले एक खतरनाक पैटर्न बन गए हैं। साल 2026 की पहली तिमाही में ही हमलों में 25% की वृद्धि दर्ज की गई है।
| आतंकी संगठन | सक्रिय क्षेत्र | मुख्य गतिविधि |
| बोको हराम | उत्तर-पूर्व नाइजीरिया | अपहरण और आत्मघाती हमले |
| ISWAP | टिम्बकटू ट्रायंगल (गढ़) | क्षेत्रीय नियंत्रण और धार्मिक हिंसा |
अंतर्राष्ट्रीय चुप्पी और स्थानीय स्थिति
वीडियो रिपोर्टर लॉरेंस जोंगो ने दावा किया है कि सुरक्षा बलों को पहले ही चेतावनी दी गई थी, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया। वीडियो के कैप्शन में यह भी सवाल उठाया गया है कि संयुक्त राष्ट्र (UN), यूरोपीय संघ (EU) और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICC) जैसे संगठन इस नरसंहार पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं।
निष्कर्ष
देवोलीना भट्टाचार्जी का यह गुस्सा केवल एक अभिनेत्री की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि उन हजारों लोगों की आवाज है जो धर्म के नाम पर हो रही इस हिंसा के खिलाफ हैं। नाइजीरिया में ईसाइयों के खिलाफ बढ़ती यह नृशंसता वैश्विक शांति के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी है।
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