कानपुर। पिछले एक हफ्ते से सोशल मीडिया पर ‘क्षत्रिय बनाम ब्राह्मण’ की बहस का केंद्र बनीं दो महिलाओं के बीच का विवाद अब ठंडा पड़ता दिखाई दे रहा है। आस्था सिंह और ऋतु त्रिपाठी, जिन्होंने वीडियो वार के जरिए एक-दूसरे पर तीखे हमले किए थे, अब कानूनी पचड़ों से बचने के लिए सुलह की राह पर हैं।
प्रमुख घटनाक्रम: एक नज़र में
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तहरीर के बाद भी FIR नहीं: पुलिस के पास दोनों पक्षों की ओर से लिखित शिकायतें (तहरीर) पहुँच चुकी हैं, लेकिन पुलिस ने अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं किया है। प्रशासन फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है।
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तेवर हुए नरम: विवाद की शुरुआत में जहां दोनों पक्ष आक्रामक थे, वहीं अब कैमरे और सोशल मीडिया से दूरी बना रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, दोनों महिलाएं अब इस प्रकरण को और खींचने के पक्ष में नहीं हैं।
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बैंक की भूमिका पर पेंच: विवाद की जड़ बैंक में हुई एक घटना को बताया जा रहा है। बैंक अधिकारियों पर लगे आरोपों के बाद अब प्रबंधन खुद के बचाव और मामले को रफा-दफा करने की जुगत में लगा है।
पुलिस की कार्रवाई और ‘मिशन शक्ति’
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने इसकी जांच ‘मिशन शक्ति केंद्र’ को सौंप दी है। विवाद की सच्चाई जानने के लिए पुलिस ने बैंक से घटना के दिन की CCTV फुटेज मांगी है। सोमवार को पुलिस की एक टीम बैंक का दौरा कर सकती है, जिसके बाद ही साफ होगा कि विवाद की पहली चिंगारी कहाँ से सुलगी थी।
सामाजिक संगठनों की सक्रियता
विवाद के दौरान आस्था सिंह भदौरिया को कई क्षत्रिय संगठनों ने घर जाकर पगड़ी और पटका पहनाकर समर्थन दिया था, वहीं ऋतु त्रिपाठी के ‘ब्राह्मण होने’ वाले बयान ने भी इंटरनेट पर काफी चर्चा बटोरी थी। हालांकि, अब शहर के संभ्रांत लोग दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता (Settlement) कराने की कोशिशों में जुटे हैं।
प्रशासनिक रुख: पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल शांति व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है।
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