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अमेरिकी सीनेट का बड़ा फैसला: रूसी तेल खरीद पर प्रस्तावित 500% टैरिफ घटाकर किया 100%, भारत को मिली बड़ी राहत

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वाशिंगटन । बुधवार, 15 जुलाई 2026

वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत के आर्थिक हितों के लिहाज से अमेरिका से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी सांसदों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले ऐतिहासिक विधेयक ‘सैंक्शनिंग रशिया एक्ट 2026’ (Sanctioning Russia Act of 2026) का नया और संशोधित संस्करण पेश कर दिया है। इस नए संस्करण में भारत और चीन जैसे प्रमुख देशों को बड़ी राहत देते हुए, रूसी तेल व गैस आयात पर पहले से प्रस्तावित 500% के भारी-भरकम ‘ब्लैंकेट टैरिफ’ को घटाकर अधिकतम 100% कर दिया गया है।

सीनेटर लिंडसे ग्राहम की विरासत बना यह नया बिल

इस द्विदलीय (bipartisan) बिल को सबसे पहले दक्षिण कैरोलिना के दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और कनेक्टिकट के डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल ने अप्रैल 2025 में तैयार किया था। हाल ही में सीनेटर ग्राहम के अचानक निधन के बाद इस बिल को पारित करने की कवायद और तेज हो गई है। अपनी मृत्यु से ठीक एक दिन पहले, ग्राहम ने यूक्रेन का दौरा किया था और वॉशिंगटन लौटकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ इस बिल को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण सहमति बनाई थी। अमेरिकी संसद में अब इस बिल को दिवंगत सीनेटर ग्राहम की विरासत के रूप में देखा जा रहा है।

सिर्फ ‘टॉप-5’ खरीदारों पर ही लागू होगा नियम

मूल बिल की तुलना में संशोधित विधेयक में कई अहम और व्यावहारिक बदलाव किए गए हैं:

  1. सीमित दायरा: पहले यह टैरिफ रूसी तेल खरीदने वाले सभी 63 देशों पर लागू होना था, लेकिन अब इसे सीमित करके केवल शीर्ष 5 तेल और शीर्ष 5 गैस खरीदार देशों तक ही सीमित कर दिया गया है।

  2. टैरिफ में 400% की कटौती: प्रस्तावित अधिकतम सीमा को 500% से घटाकर 100% कर दिया गया है। हालांकि, वास्तविक टैरिफ दर का निर्धारण अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) द्वारा किया जाएगा।

  3. राष्ट्रपति ट्रंप को विशेष अधिकार (Waiver Power): बिल के नए संस्करण में एक विशेष प्रावधान जोड़ा गया है, जिसके तहत यदि अमेरिकी राष्ट्रपति को लगता है कि प्रतिबंध हटाना या ढील देना अमेरिकी राष्ट्रीय हित में है, तो वे इन प्रतिबंधों को निलंबित या माफ कर सकते हैं।

कौन हैं रूसी ऊर्जा के शीर्ष खरीदार?

अमेरिकी सीनेट के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में रूसी कच्चे तेल (Crude Oil) के टॉप-5 खरीदारों में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान शामिल हैं। वहीं, रूसी नेचुरल गैस (Natural Gas) के शीर्ष पांच आयातकों में चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम का नाम है।

नए नियमों के मुताबिक, जो देश रूस के कुल गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और इसमें लगातार कमी लाने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं, उन्हें इस प्रतिबंध से पूरी तरह छूट मिल सकती है। इस क्लॉज के चलते जापान, फ्रांस और बेल्जियम जैसे अमेरिकी सहयोगियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है मुख्य उद्देश्य

पिछले चार वर्षों से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका लगातार मॉस्को की कमाई के मुख्य स्रोत यानी ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बना रहा है। इस नए बिल में रूस के ‘शैडो फ्लीट’ (गुप्त टैंकर बेड़े जो पश्चिमी नियमों को दरकिनार कर तेल परिवहन करते हैं), रूसी सेंट्रल बैंक सहित प्रमुख वित्तीय संस्थानों और ‘यामल एलएनजी’ व ‘आर्कटिक एलएनजी 1, 2, 3’ जैसी बड़ी सरकारी ऊर्जा परियोजनाओं पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है।

इस विधेयक को अमेरिकी सीनेट में 26 से अधिक सह-प्रायोजकों (co-sponsors) का मजबूत समर्थन प्राप्त है और सांसदों को भरोसा है कि यह बहुत जल्द भारी बहुमत से पारित हो जाएगा। भारत के लिए यह खबर इसलिए राहत भरी है क्योंकि 500% टैरिफ के मुकाबले 100% की सीमा और राष्ट्रपति ट्रंप के पास मौजूद ‘वेवर पावर’ के कारण भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने और अमेरिका के साथ कूटनीतिक बातचीत करने के लिए एक बड़ा लचीलापन मिल गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. अमेरिका रूसी तेल खरीदारों पर टैरिफ क्यों लगा रहा है?

Ans: अमेरिका का मुख्य उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था पर चोट करना है। चूंकि रूस अपने युद्ध खर्चों की फंडिंग तेल और गैस निर्यात से मिलने वाले राजस्व से करता है, इसलिए अमेरिका इन प्रतिबंधों के जरिए रूस की कमाई के रास्तों को बंद करना चाहता है।

Q2. पहले के बिल और संशोधित बिल (2026) में क्या अंतर है?

Ans: मूल बिल में रूसी तेल खरीदने वाले सभी देशों पर 500% ब्लैंकेट टैरिफ का प्रस्ताव था। संशोधित बिल में इसे घटाकर अधिकतम 100% कर दिया गया है और यह केवल शीर्ष 5 आयातकों पर ही लागू होगा। साथ ही, इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति को प्रतिबंधों में छूट देने का विशेष अधिकार भी दिया गया है।

Q3. क्या भारत पर 100% टैरिफ तुरंत लागू हो जाएगा?

Ans: नहीं। बिल के कानून बनने के बाद भी, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) यह तय करेगा कि वास्तविक टैरिफ दर क्या होगी। इसके अलावा, भारत द्वारा तेल आयात घटाने के प्रयासों या भू-राजनीतिक वार्ताओं के आधार पर राष्ट्रपति ट्रंप इस पर छूट (Waiver) दे सकते हैं।

Disclaimer: यह लेख उपलब्ध वैश्विक समाचार स्रोतों और अमेरिकी सीनेट में पेश किए गए हालिया घटनाक्रमों के आधार पर तैयार किया गया है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और व्यापार नियमों में बदलाव के संबंध में अंतिम निर्णय संबंधित सरकारों के आधिकारिक आदेशों पर निर्भर करता है।

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