लखनऊ. उत्तर प्रदेश, जो मनरेगा का सबसे बड़ा लाभार्थी राज्य है, वर्तमान में एक बड़े प्रशासनिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। केंद्र सरकार द्वारा योजना का नाम बदलकर “विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)” करने के बाद पारदर्शिता के दावे तो बढ़े हैं, लेकिन भ्रष्टाचार की जड़ें अभी भी गहरी हैं।
1. बड़ा खुलासा: 300 करोड़ का घोटाला और फर्जीवाड़ा
हालिया केंद्रीय जांच (जनवरी 2026) में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश सहित 25 राज्यों में हुई ऑडिट में 11 लाख से अधिक वित्तीय अनियमितताएं पाई गई हैं।
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यूपी का हिस्सा: उत्तर प्रदेश में लगभग ₹1,214.85 करोड़ की देनदारी (Liabilities) लंबित है, जो देश में दूसरे नंबर पर है।
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फर्जी मस्टर रोल: कानपुर देहात और पूर्वांचल के कई जिलों में ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ प्रधानों ने अपने रिश्तेदारों और व्यक्तिगत खातों में लाखों रुपए ट्रांसफर किए।
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मशीनों का प्रयोग: कानूनन मजदूरों से कराए जाने वाले कार्यों में जेसीबी और अन्य मशीनों का अवैध उपयोग धड़ल्ले से जारी है।
2. नई नीति: 100 से बढ़कर 125 दिन का रोजगार
वर्ष 2026 की सबसे बड़ी खबर यह है कि सरकार ने अब रोजगार की गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया है।
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बजट 2026: इस साल के बजट में रिकॉर्ड आवंटन की उम्मीद है, क्योंकि सरकार ने फंडिंग मॉडल को ‘डिमांड-बेस्ड’ से हटाकर ‘नॉर्मेटिव’ कर दिया है।
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मजदूरी दर: यूपी में वर्तमान मजदूरी दर में लगभग 3.04% की मामूली वृद्धि हुई है, जो अन्य राज्यों (जैसे हरियाणा) की तुलना में काफी कम है।
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3. डिजिटल दीवार: e-KYC और आधार का संकट
नवंबर 2025 से Aadhaar-Based Payment System (ABPS) और अनिवार्य e-KYC ने ग्रामीण मजदूरों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
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तकनीकी बाधा: यूपी के दूरदराज के गांवों में कमजोर इंटरनेट और स्मार्टफोन की कमी के कारण हजारों मजदूरों का e-KYC लंबित है, जिससे उनका काम और भुगतान दोनों रुक गए हैं।
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जियो-टैगिंग: अब हर काम की ‘रियल-टाइम’ फोटो और ‘जियो-टैगिंग’ अनिवार्य है, जिससे कागजों पर होने वाले फर्जी तालाबों और सड़कों के निर्माण पर लगाम कसने की कोशिश की जा रही है।
प्रमुख आकड़ों पर एक नजर
| विवरण | स्थिति (2025-26) |
| यूपी में लंबित देनदारी | ₹1,214.85 करोड़ |
| काम के दिनों की गारंटी | 125 दिन (प्रस्तावित/लागू) |
| प्रमुख घोटाला क्षेत्र | फर्जी बिलिंग और मशीनों का अवैध उपयोग |
| नई तकनीक | पंचायत निर्णय ऐप और जियो-टैगिंग |
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