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पालमेडु जल्लीकट्टू 2026: मदुरै में शौर्य का महाकुंभ शुरू, 1000 बैलों और 600 खिलाड़ियों के बीच रोमांचक मुकाबला

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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पालमेडु, मदुरै: मदुरै जिले के पालमेडु में आज सुबह पारंपरिक उत्साह के साथ जल्लीकट्टू खेल का आगाज हुआ। तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने ‘वादिवासल’ (प्रवेश द्वार) से पहले बैल को छोड़कर प्रतियोगिता की शुरुआत की।

आज के आयोजन के मुख्य बिंदु:

  • भागीदारी: इस वर्ष पालमेडु में 1,000 से अधिक बैलों और लगभग 500 से 600 माडुपुडिगल (बैल पकड़ने वाले योद्धाओं) का पंजीकरण हुआ है।

  • विजेताओं के लिए पुरस्कार: सबसे अधिक बैलों को काबू करने वाले ‘वीर’ और सबसे ताकतवर बैल के मालिकों को कार, ट्रैक्टर, दोपहिया वाहन और सोने के सिक्के जैसे आकर्षक इनाम दिए जा रहे हैं।

  • सुरक्षा व्यवस्था: आयोजन स्थल पर 2,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। दर्शकों और प्रतिभागियों की सुरक्षा के लिए मजबूत बैरिकेडिंग और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है।

  • मेडिकल टीम: मौके पर 20 से अधिक एम्बुलेंस और डॉक्टरों की टीम तैनात है। प्रतिभागियों के साथ-साथ बैलों की भी मेडिकल जांच (नशा या चोट के लिए) की जा रही है।

नियम और परंपरा:

जल्लीकट्टू का यह खेल ‘मट्टू पोंगल’ के अवसर पर आयोजित किया जाता है। नियमों के अनुसार, खिलाड़ियों को बैल के कूबड़ (hump) को पकड़कर एक निश्चित दूरी तक या बैल के तीन बार कूदने तक उस पर नियंत्रण बनाए रखना होता है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।