सनातन धर्म में भगवान शिव की पूजा बिना ‘बेलपत्र’ के अधूरी मानी जाती है। जहाँ अन्य देवताओं को फल, फूल और कीमती आभूषण प्रिय हैं, वहीं देवाधिदेव महादेव मात्र एक लोटा जल और तीन पत्तियों वाला बेलपत्र चढ़ाने से ही प्रसन्न हो जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक साधारण सी दिखने वाली पत्ती भोलेनाथ को इतनी प्रिय क्यों है?
1. पौराणिक कथा: कैसे हुई बेलपत्र की उत्पत्ति?
‘स्कंद पुराण’ के अनुसार, एक बार माता पार्वती के पसीने की बूंदें मंदार पर्वत पर गिरीं, जिससे ‘बिल्व’ के वृक्ष की उत्पत्ति हुई। माना जाता है कि बेल के पेड़ की जड़ों में गिरिजा, तने में माहेश्वरी, शाखाओं में दक्षयायनी और पत्तियों में माता पार्वती के विभिन्न रूप वास करते हैं।
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त्रिदल का रहस्य: “त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्।” बेलपत्र की तीन पत्तियां सत, रज और तम गुणों का प्रतीक हैं। साथ ही यह शिव के तीन नेत्रों और उनके प्रमुख अस्त्र ‘त्रिशूल’ का भी प्रतिनिधित्व करती हैं।
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समुद्र मंथन का प्रसंग: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब विष निकला, तो महादेव ने संसार की रक्षा के लिए उसे पी लिया। विष की तपन से शिव का गला और शरीर जलने लगा। तब देवताओं ने बेलपत्र का प्रयोग कर उनकी जलन को शांत किया, तभी से महादेव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है।
2. बेलपत्र चढ़ाने के कड़े नियम (शास्त्रों के अनुसार)
शिव पुराण में बेलपत्र चढ़ाने के कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिनका पालन न करने पर पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता:
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अखंडित पत्र: बेलपत्र कभी भी कटा-फटा नहीं होना चाहिए।
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चिकना हिस्सा: शिवजी को हमेशा बेलपत्र का चिकना वाला भाग नीचे (शिवलिंग की ओर) करके चढ़ाना चाहिए।
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तिथि का ध्यान: चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या और संक्रांति के दिन बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। यदि इन तिथियों पर पूजा करनी हो, तो एक दिन पहले ही पत्ते तोड़कर रख लेने चाहिए।
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बासी नहीं होता: बेलपत्र कभी बासी नहीं होता। यदि नया बेलपत्र उपलब्ध न हो, तो चढ़ाए हुए बेलपत्र को धोकर पुनः शिवलिंग पर अर्पित किया जा सकता है।
3. वैज्ञानिक आधार: केवल आस्था नहीं, औषधि भी है
बेलपत्र का महत्व केवल धर्म तक सीमित नहीं है, विज्ञान भी इसके गुणों को स्वीकार करता है:
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शीतलता प्रदान करना: बेलपत्र की प्रकृति अत्यंत शीतल होती है। शिवलिंग पर इसे चढ़ाने का वैज्ञानिक तर्क यह है कि शिवलिंग ऊर्जा का केंद्र है और बेलपत्र उस ताप को अवशोषित कर वातावरण को संतुलित रखता है।
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आयुर्वेद का खजाना: बेल के पत्तों में ‘टेनिन’ और ‘फिनाइल’ जैसे तत्व पाए जाते हैं। यह मधुमेह (Diabetes), उच्च रक्तचाप और पाचन संबंधी विकारों में रामबाण औषधि है।
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एंटी-बैक्टीरियल गुण: बारिश के मौसम में हवा में पनपने वाले हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने की क्षमता बेल के वृक्ष में सबसे अधिक होती है, इसलिए सावन के महीने में इसका महत्व और बढ़ जाता है।
4. आध्यात्मिक संदेश
बेलपत्र हमें जीवन का एक गहरा दर्शन सिखाता है। जिस तरह तीन अलग पत्तियां एक ही डंठल से जुड़ी होती हैं, उसी तरह हमारा शरीर, मन और आत्मा भी एक ही ईश्वर से जुड़े होने चाहिए। महादेव को बेलपत्र चढ़ाना इस बात का प्रतीक है कि हम अपने तीनों गुणों (सात्विक, राजसिक, तामसिक) को ईश्वर के चरणों में समर्पित कर रहे हैं।
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