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पंजाब में अवैध माइनिंग पर NGT का शिकंजा: 85 खनन साइटों पर तत्काल प्रभाव से रोक

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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चंडीगढ़. पंजाब में अवैध और अनियंत्रित माइनिंग के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने एक सख्त फैसला सुनाया है। एनजीटी की प्रिंसिपल बेंच ने पंजाब सरकार द्वारा हाल ही में चिन्हित की गई सभी 85 माइनिंग साइट्स पर रेत और बजरी निकालने के काम पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।

मामला क्या है?

यह आदेश गुरदासपुर जिले के गांव गाहलड़ी की पंचायत द्वारा दायर एक आवेदन पर सुनवाई करते हुए दिया गया। पंचायत ने गांव के पास दरिया से रेत निकालने की टेंडरिंग प्रक्रिया का कड़ा विरोध किया था। ग्रामीणों का तर्क था कि दरिया से नीचे बसे होने के कारण, यदि यहाँ से रेत निकाली गई तो गांव की जमीन और घरों पर सीधा खतरा मंडराने लगेगा।

कोर्ट में दी गई मुख्य दलीलें:

  • एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस (EC) की कमी: पंचायत के वकील ने दलील दी कि रेत-बजरी निकालने का काम पूरी तरह से व्यावसायिक (Commercial) है। नियमों के मुताबिक, इसके लिए जरूरी पर्यावरण क्लीयरेंस नहीं ली गई थी।

  • बाढ़ का खतरा: पिछले साल अगस्त और सितंबर में राज्य में आई विनाशकारी बाढ़ का हवाला दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार, अवैध माइनिंग के कारण बाढ़ का पानी खेतों में घुसा, जिससे भारी तबाही हुई थी।

एनजीटी का फैसला:

एनजीटी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आदेश दिया कि:

  1. सरकार टेंडरिंग की प्रक्रिया (कागजी कार्रवाई) को आगे बढ़ा सकती है।

  2. लेकिन, किसी भी साइट पर फिजिकल माइनिंग (रेत की निकासी) तब तक शुरू नहीं होगी जब तक ट्रिब्यूनल अगला आदेश न दे दे।

ग्रामीणों और अधिकारियों की प्रतिक्रिया

फैसले का स्वागत करते हुए पूर्व सरपंच गुरपाल सिंह और सतनाम सिंह ने कहा, “लगातार माइनिंग से हमारी खेती की जमीन बर्बाद हो रही है। हम इस जगह पर माइनिंग पर पूरी तरह पाबंदी चाहते हैं।”

वहीं, माइनिंग विभाग के अधिकारियों ने फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि वे एनजीटी के लिखित आदेशों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद ही अपना अगला कदम उठाएंगे।

प्रभाव: यह फैसला पंजाब सरकार के उस प्रयास को बड़ा झटका माना जा रहा है जिसके जरिए वह राज्य में खनन कार्यों को रफ्तार देकर राजस्व जुटाने की कोशिश कर रही थी।

matribhumisamachar.com/punjab-news/

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।