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झारखंड 108 एम्बुलेंस हड़ताल पर ब्रेक: श्रम विभाग की कंपनी को 15 दिनों की ‘अंतिम चेतावनी’, क्या सुलझेगा विवाद?

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रांची श्रम भवन के बाहर प्रदर्शन करते झारखंड 108 एम्बुलेंस कर्मचारी

रांची: झारखंड की जीवन रेखा मानी जाने वाली ‘108 एम्बुलेंस सेवा’ के कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच चल रहा गतिरोध फिलहाल थमता नजर आ रहा है। राजधानी रांची के डोरंडा स्थित श्रम भवन में हुए जोरदार प्रदर्शन के बाद, श्रम विभाग ने हस्तक्षेप करते हुए कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि 15 दिनों के भीतर विसंगतियां दूर नहीं की गईं, तो संबंधित कंपनी के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

🚨 आंदोलन की मुख्य वजह: वेतन कटौती और शोषण

शुक्रवार को झारखंड प्रदेश एम्बुलेंस कर्मचारी संघ के बैनर तले सैकड़ों कर्मचारी अपनी व्यथा लेकर सड़कों पर उतरे। कर्मचारियों का आरोप है कि वर्तमान प्रबंधन द्वारा न केवल उनके वेतन में मनमानी कटौती की जा रही है, बल्कि बकाया भुगतान और काम के घंटों को लेकर भी उनका शोषण हो रहा है।

मुख्य मांगें जिन पर चर्चा हुई:

  • पिछले कई महीनों से लंबित वेतन का पूर्ण भुगतान

  • न्यूनतम मजदूरी अधिनियम का सख्ती से पालन।

  • पुरानी कंपनी (जिकित्जा हेल्थ केयर) द्वारा रोकी गई ग्रेच्युटी का तत्काल भुगतान।

  • कर्मचारियों के साथ हो रहे कथित दुर्व्यवहार और अनियमितताओं पर रोक।

⚖️ श्रम विभाग की ‘सख्त’ चेतावनी

वार्ता के दौरान संयुक्त श्रमायुक्त प्रदीप रोबर्ट लकड़ा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए श्रम अधीक्षक को तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं। विभाग ने आश्वासन दिया है कि:

  1. 7 से 15 दिनों के भीतर शिकायतों का निपटारा करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

  2. जो कर्मचारी 5 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके हैं, उनसे ‘फार्म एन’ भरवाकर ग्रेच्युटी दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

  3. दोषी पाए जाने पर प्रबंधन और संबंधित कंपनी के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) तक दर्ज की जा सकती है।

“हम मजदूरों के हितों से समझौता नहीं करेंगे। यदि कंपनी तय समय सीमा में सुधार नहीं करती है, तो विभाग कानून के तहत सख्त कदम उठाएगा।”श्रम विभाग के अधिकारी

🕒 15 दिनों का ‘डेडलाइन’ और अल्टीमेटम

संघ के प्रदेश अध्यक्ष नीरज तिवारी ने वार्ता के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि संगठन फिलहाल जनहित को देखते हुए आंदोलन को स्थगित कर रहा है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों को वापस अपने जिलों में जाकर सेवा जारी रखने को कहा गया है ताकि मरीजों को परेशानी न हो।

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी:

“अगर 15 दिनों में हमारी फाइलें आगे नहीं बढ़ीं और धरातल पर बदलाव नहीं दिखा, तो झारखंड में एम्बुलेंस के पहिए फिर थम जाएंगे। इस बार आंदोलन और भी बड़ा होगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।”

📋 क्या होगा राज्य की स्वास्थ्य सेवा पर असर?

झारखंड जैसे पहाड़ी और ग्रामीण परिवेश वाले राज्य में 108 एम्बुलेंस सेवा ‘गोल्डन ऑवर’ में मरीजों की जान बचाने के लिए बेहद जरूरी है। यदि यह विवाद नहीं सुलझता है, तो राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा सकती हैं। वर्तमान में, सरकार पीपीपी मोड (PPP Mode) के तहत इन सेवाओं का संचालन करा रही है, जिसे लेकर अक्सर विवाद सामने आते रहते हैं।

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