लखनऊ | गुरूवार, 16 अप्रैल 2026
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले से आस्था और व्यक्तिगत विश्वास की एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ के प्रसिद्ध कालीबाड़ी मंदिर में गुरुवार को एक युवक ने अपनी अंतरात्मा की पुकार पर सनातन धर्म अपना लिया। तिलहर कस्बे के रहने वाले फैज अब सोनू चौहान के नाम से जाने जाएंगे। वैदिक रीति-रिवाजों के बीच संपन्न हुए इस अनुष्ठान ने जिले में चर्चा का विषय बना दिया है।
वैदिक मंत्रोच्चार और हवन से हुआ शुद्धिकरण
गुरुवार को शहर के कालीबाड़ी मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिमय रहा। कार्यक्रम की शुरुआत विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ की गई। सोनू चौहान (पूर्व में फैज) ने विधि-विधान से हवन कुंड में आहुतियां दीं।
“यह पूरी प्रक्रिया शास्त्रोक्त विधि से संपन्न कराई गई है। गंगाजल से शुद्धिकरण के पश्चात युवक ने स्वेच्छा से हिंदू धर्म की दीक्षा ली और मां काली का आशीर्वाद प्राप्त किया।”
— राजेश अवस्थी, महासचिव, सेंट्रल बार एसोसिएशन
भगवान शिव में अटूट श्रद्धा बनी आधार
धर्म परिवर्तन के बाद सोनू चौहान ने मीडिया से बात करते हुए अपने इस बड़े फैसले के पीछे की वजह साझा की। उन्होंने बताया कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि लंबे समय से उनकी आस्था भगवान शिव में रही है।
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अंतरात्मा की आवाज: सोनू ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी के बहकावे या प्रलोभन में आकर यह कदम नहीं उठाया है।
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स्वैच्छिक निर्णय: उन्होंने प्रशासन और समाज के सामने यह साफ कर दिया कि यह पूरी तरह से उनका व्यक्तिगत और स्वैच्छिक निर्णय है।
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सनातन से जुड़ाव: उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की जीवनशैली और देवों के प्रति समर्पण ने उन्हें हमेशा प्रभावित किया है।
सामाजिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन
इस ‘घर वापसी’ के दौरान कानून और मर्यादा का पूरा ध्यान रखा गया। कार्यक्रम में सेंट्रल बार एसोसिएशन के महासचिव राजेश अवस्थी के साथ दुर्गेश मिश्रा, संतोष कुमार और कई स्थानीय लोग मौजूद रहे। जानकारों का कहना है कि इस तरह के मामलों में अक्सर कानूनी शपथ-पत्र और जिला प्रशासन को सूचना देने की प्रक्रिया भी पूरी की जाती है, ताकि भविष्य में कोई विवाद न हो।
क्षेत्र में चर्चा का विषय
तिलहर जैसे छोटे कस्बे से निकलकर इस तरह का निर्णय लेना सोनू के लिए साहसी कदम माना जा रहा है। मंदिर के बाहर मौजूद लोगों ने फूल-मालाओं के साथ सोनू चौहान का स्वागत किया। इस घटना के बाद से सोशल मीडिया पर भी शाहजहांपुर की यह खबर तेजी से वायरल हो रही है, जिसे लोग “व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आस्था” का उदाहरण बता रहे हैं।
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