कानपुर । मंगलवार, 16 जून 2026
उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और लू (Heatwave) का प्रकोप झेल रहे नागरिकों, छात्रों और विशेषकर किसानों के लिए राहत की खबर आ रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून धीरे-धीरे उत्तर प्रदेश की सीमा की तरफ कदम बढ़ा रहा है। हालांकि, इस बार इसकी चाल में थोड़ी सुस्ती देखी गई है, जिसके चलते तारीखों में कुछ बदलाव संभव हैं।
आइए जानते हैं उत्तर प्रदेश और औद्योगिक नगरी कानपुर में मानसून की बारिश को लेकर क्या है सटीक और ताजा अपडेट।
उत्तर प्रदेश में मानसून की मौजूदा स्थिति
आमतौर पर मानसून जून के तीसरे सप्ताह (15 से 20 जून) तक पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश के हिस्सों को कवर कर लेता है। लेकिन इस वर्ष बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बने मौसमी सिस्टम की धीमी गति के कारण मानसून अपने तय समय से 4 से 5 दिन की देरी से चल रहा है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अब उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मानसून के जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के पहले सप्ताह के बीच पूरी तरह सक्रिय होने की प्रबल संभावना है।
कानपुर में कब थमेगा गर्मी का सितम?
कानपुर में मानसून पहुंचने की मानक तिथि 20 से 25 जून मानी जाती है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान को देखें तो इस साल कानपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में मानसूनी हवाएं 25 जून से जुलाई के प्रथम सप्ताह के दौरान कभी भी दस्तक दे सकती हैं।
वर्तमान मौसम (16 जून) की बात करें तो अभी कानपुर का अधिकतम तापमान 40°C के आसपास बना हुआ है और रात का तापमान भी 30°C के करीब दर्ज किया जा रहा है। ऐसे में जून के अंत में आने वाली मानसूनी फुहारें ही इस उमस और झुलसाने वाली गर्मी से स्थायी निजात दिलाएंगी।
प्री-मानसून और वास्तविक मानसून का अंतर समझना जरूरी
इन दिनों उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, और वाराणसी सहित कई जिलों में धूल भरी आंधी के साथ अचानक तेज हवाएं और गरज-चमक के साथ हल्की बूंदाबांदी हो रही है। आम जनता इसे मानसून की शुरुआत मान लेती है, लेकिन मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह केवल प्री-मानसून गतिविधियां (Pre-Monsoon Activities) हैं।
विशेष नोट: प्री-मानसून की बारिश स्थानीय हीटिंग (लोकल हीटिंग) और पश्चिमी विक्षोभ के असर से होती है। इससे कुछ घंटों के लिए तो पारा गिरता है, लेकिन हवा में नमी बढ़ने के कारण उमस (Humidity) बढ़ जाती है। वास्तविक मानसूनी वर्षा तब कहलाती है जब ठंडी पुरवैया हवाएं लगातार चलती हैं और कई दिनों तक झमाझम बारिश का दौर जारी रहता है।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह हफ्ता?
उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और कृषि पूरी तरह से मानसून पर निर्भर है। जून का आखिरी हफ्ता किसानों के लिए बेहद संवेदनशील होता है:
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धान की नर्सरी: धान की समय पर रोपाई के लिए पानी की भारी आवश्यकता होती है।
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खरीफ फसलें: मक्का, बाजरा, ज्वार और तिलहन जैसी फसलों की बुआई सीधे तौर पर पहली अच्छी मानसूनी बारिश के बाद ही शुरू की जाती है।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान भाई प्री-मानसून की छिटपुट बारिश को देखकर जल्दबाजी में बुआई न करें। जून के अंतिम सप्ताह में जब मानसून की निरंतर वर्षा शुरू हो जाए, तभी खेतों में बीज डालें ताकि बेहतर अंकुरण हो सके और लागत बेकार न जाए।
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