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विशेष रिपोर्ट: चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी प्रतिबंधों का साया, क्या पीछे हटेगा भारत?

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नई दिल्ली. ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह को लेकर हाल के दिनों में काफी हलचल है। भारत की महत्वाकांक्षी और रणनीतिक परियोजना ‘चाबहार बंदरगाह’ इस समय एक बड़े कूटनीतिक चौराहे पर खड़ी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई नीतियों और ईरान पर बढ़ते प्रतिबंधों के कारण इस प्रोजेक्ट के भविष्य को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

1. ताज़ा स्थिति: क्या भारत ने काम बंद कर दिया?

पिछले 24 घंटों में ऐसी कई खबरें आईं कि भारत ने चाबहार में अपना परिचालन (Operations) बंद कर दिया है। हालांकि, भारत सरकार ने इन खबरों का खंडन किया है।

  • विदेश मंत्रालय (MEA) का बयान: प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत अभी भी इस प्रोजेक्ट पर ट्रैक पर है।

  • सशर्त छूट: अमेरिकी वित्त विभाग (Treasury Department) ने 28 अक्टूबर 2025 को भारत को एक सशर्त छूट (Waiver) दी थी, जो 26 अप्रैल 2026 तक वैध है। भारत सरकार वर्तमान में इस छूट को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी प्रशासन के साथ चर्चा कर रही है।

2. $120 मिलियन का निवेश और ‘डी-रिस्किंग’ रणनीति

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता के तहत लगभग 120 मिलियन डॉलर (करीब 1,000 करोड़ रुपये) ईरान को हस्तांतरित कर दिए हैं।

  • रणनीतिक बदलाव: भारत अपने जोखिम को कम करने के लिए ‘इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड’ (IPGL) जैसी सरकारी संस्थाओं की प्रत्यक्ष भूमिका को सीमित कर सकता है।

  • वैकल्पिक मॉडल: विचार किया जा रहा है कि एक ऐसी नई इकाई (Entity) बनाई जाए जो सीधे तौर पर अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में न आए, ताकि अप्रैल 2026 के बाद भी काम जारी रह सके।

3. चुनौतियां और ट्रंप का ‘25% टैरिफ’ कार्ड

भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का हालिया बयान है। उन्होंने घोषणा की है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश पर अमेरिका 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा।

  • अमेरिका के साथ भारत का व्यापार लगभग $86 बिलियन से अधिक है। ऐसे में भारत के लिए चाबहार के सामरिक महत्व और अमेरिका के साथ आर्थिक संबंधों के बीच संतुलन बनाना एक कठिन चुनौती बन गया है।

4. विपक्ष का हमला और सरकार का बचाव

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने अमेरिकी दबाव में आकर चाबहार पर नियंत्रण खो दिया है। वहीं, सरकार का कहना है कि चाबहार भारत की ‘कनेक्टिविटी रणनीति’ का अहम हिस्सा है और इसे इतनी आसानी से नहीं छोड़ा जाएगा।

5. चाबहार क्यों है भारत के लिए ‘गेम चेंजर’?

  • पाकिस्तान को बायपास: यह भारत को पाकिस्तान के बिना अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधा व्यापार मार्ग देता है।

  • ग्वादर का जवाब: यह चीन द्वारा निर्मित पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट का रणनीतिक मुकाबला करता है।

  • INSTC: यह अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे का मुख्य द्वार है, जो रूस और यूरोप तक भारत की पहुंच आसान बनाता है।

चाबहार पर अगले तीन महीने (अप्रैल 2026 तक) कूटनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारत की कोशिश है कि वह ‘प्रबंधित भागीदारी’ (Managed Involvement) के जरिए पोर्ट का संचालन बनाए रखे ताकि उसके करोड़ों रुपये का निवेश और रणनीतिक हित सुरक्षित रहें।

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