लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन का माहौल उस समय दिलचस्प हो गया जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस की जगह ‘काव्यात्मक संग्राम’ ने ले ली। सपा विधायक डॉ. रागिनी सोनकर और माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी के बीच हुई इस नोकझोंक ने न केवल सदन का ध्यान खींचा, बल्कि सोशल मीडिया पर भी यह चर्चा का विषय बन गया है।
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डॉ. रागिनी ने तंज से घेरा
सदन की कार्यवाही के दौरान अपनी बात को धार देते हुए सपा विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने वर्तमान राजनीतिक हालातों पर कटाक्ष करते हुए एक शायरी पढ़ी:
“श्री राम चन्द्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा,
मेरे नाम से सत्ता पाकर सबको आंख दिखाएगा।
धर्मों को लड़वाएगा और जाति को बटवाएगा,
सभी गरीब के बच्चों को बिन शिक्षा रौंदा जाएगा।”
शायरी के माध्यम से उन्होंने सरकार पर धर्म और जाति की राजनीति करने और गरीबों की शिक्षा की अनदेखी करने का सीधा आरोप लगाया। इसके साथ ही उन्होंने सेवानिवृत्त प्रधानाचार्यों और शिक्षकों के खाली पड़े पदों को भरने के लिए सरकार से निश्चित समय सीमा की मांग की। डॉ. रागिनी के इस अंदाज़ पर विपक्षी खेमे ने जमकर मेजें थपथपाईं।
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मंत्री गुलाब देवी का ‘सागर’ वाला जवाब
विपक्ष के इन तीखे बाणों का जवाब देने के लिए माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी भी पूरी तैयारी के साथ उतरीं। उन्होंने डॉ. रागिनी की शैली में ही पलटवार करते हुए कहा:
“जानकर अंजान बने, ये कुछ और बात है,
इनको मालूम न हो, ये कुछ और बात है।
सूर्य की किरणें कितनी भी चमचमाएं,
लेकिन सागर को सुखा नहीं सकती हैं।”
मंत्री ने अपनी पंक्तियों के जरिए यह संदेश दिया कि सरकार के काम और साख इतनी विशाल है कि विपक्ष के आरोपों से उसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इस जवाब पर सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी उत्साह के साथ मेजें थपथपाकर मंत्री का समर्थन किया।
शिक्षा व्यवस्था पर सरकारी पक्ष
काव्यात्मक तंज के बाद मंत्री गुलाब देवी ने विभागीय स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की नियुक्तियां और स्कूलों के आधारभूत ढांचे (Infrastructure) का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है और रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया भी नियमानुसार गतिमान है।
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