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मुंब्रा में बड़ा सियासी उलटफेर: AIMIM नगरसेविका सहर शेख की बढ़ीं मुश्किलें, फर्जी जाति प्रमाणपत्र मामले में पिता पर FIR की तैयारी

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मुंब्रा नगरसेविका सहर शेख और उनके पिता के खिलाफ फर्जी जाति प्रमाणपत्र मामले की जांच रिपोर्ट

मुंबई | शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026

ठाणे के मुंब्रा से AIMIM की चर्चित नगरसेविका सहर शेख एक बार फिर कानूनी विवादों के केंद्र में हैं। “मुंब्रा को हरा रंग देने” वाले अपने विवादित बयान से चर्चा में आईं सहर शेख की पार्षद की कुर्सी अब खतरे में दिखाई दे रही है। ठाणे तहसीलदार कार्यालय ने उनके पिता, यूनुस शेख, के खिलाफ फर्जी ओबीसी (OBC) प्रमाणपत्र बनवाने के आरोप में आपराधिक मामला (FIR) दर्ज करने की सिफारिश की है।

क्या है मुख्य विवाद?

मामले की जड़ें नगर निगम चुनावों से जुड़ी हैं। सहर शेख ने अपनी चुनावी जीत में जिस ओबीसी प्रमाणपत्र का उपयोग किया था, उसकी वैधता पर प्रतिद्वंदी प्रत्याशी (NCP) के पिता सिद्दीकी अहमद ने सवाल उठाए थे। तहसीलदार उमेश पाटिल द्वारा की गई विस्तृत जांच में पाया गया कि यह प्रमाणपत्र प्रथम दृष्टया फर्जी है और इसे प्राप्त करने के लिए सरकारी एजेंसियों को गुमराह किया गया है।

जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे

तहसीलदार की रिपोर्ट में सहर शेख के परिवार के दस्तावेजों में कई गंभीर खामियां पाई गई हैं:

  • फॉर्म का गलत उपयोग: परिवार मूल रूप से गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला है। महाराष्ट्र के नियमों के अनुसार, प्रवासी नागरिकों को फॉर्म 10 के तहत आवेदन करना होता है, लेकिन शेख परिवार ने फॉर्म 8 (जो केवल मूल निवासियों के लिए है) के जरिए प्रमाणपत्र हासिल किया।

  • फर्जी फॉरमेट: 2011 का प्रमाणपत्र राज्य के आधिकारिक फॉरमेट में नहीं था और उस पर “State of Maharashtra” तक नहीं लिखा था।

  • हस्ताक्षर गायब: दस्तावेज पर संबंधित उप-विभागीय अधिकारी (SDO) के अनिवार्य हस्ताक्षर मौजूद नहीं थे।

  • अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन: सहर शेख ठाणे की निवासी हैं, लेकिन उनका 2018 का प्रमाणपत्र मुंबई कलेक्टर कार्यालय से जारी किया गया था, जो नियमों के विरुद्ध है।

सहर शेख और उनके पिता ‘नॉट रिचेबल’

तहसीलदार द्वारा FIR की सिफारिश किए जाने के बाद से सहर शेख और उनके पिता यूनुस शेख का कोई पता नहीं चल पा रहा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों वर्तमान में ‘नॉट रिचेबल’ हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

अब आगे क्या?

  1. पद की योग्यता (Disqualification): यदि जांच में जाति प्रमाणपत्र अवैध साबित होता है, तो सहर शेख को अपनी नगरसेविका की सदस्यता गंवानी पड़ सकती है।

  2. कानूनी शिकंजा: तहसीलदार ने पुलिस को जालसाजी और धोखाधड़ी के तहत मामला दर्ज करने का पत्र लिखा है, जिसके बाद गिरफ्तारी की संभावना भी बन सकती है।

  3. जाति वैधता समिति (Caste Validity Committee): मुंबई की जाति वैधता समिति अब इस पर अंतिम फैसला लेगी कि उनके द्वारा प्राप्त ‘वैधता प्रमाणपत्र’ को रद्द किया जाए या नहीं।

राजनीतिक गलियारे में हलचल: मुंब्रा की राजनीति में सक्रिय सहर शेख का यह विवाद AIMIM के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने स्थानीय दिग्गज नेताओं को हराकर अपनी जगह बनाई थी।

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