कानपुर. उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में अन्नदाता के साथ धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। खाद्य पदार्थों में मिलावट के बाद अब मिलावटखोरों ने खेती की बुनियाद यानी खाद को भी नहीं बख्शा। जिला प्रशासन की जांच में घाटमपुर क्षेत्र में नकली डीएपी (DAP) पकड़ी गई है, जिसमें पोषक तत्वों की मात्रा शून्य पाई गई है। इस बड़ी लापरवाही और कालाबाजारी के मामले में जिला कृषि अधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए सहकारी समिति समेत 15 दुकानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं।
मिट्टी को बताया खाद: लैब रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
जिला कृषि अधिकारी प्राची पांडेय ने बताया कि घाटमपुर के कोरियां में आरसीएफ (RCF) कंपनी की डीएपी खाद संदिग्ध लगने पर उसका नमूना जांच के लिए लैब भेजा गया था। रिपोर्ट चौंकाने वाली रही; खाद की बोरी में मिट्टी के सिवा कुछ नहीं था। लैब टेस्टिंग में खाद के जरूरी पोषक तत्व 0% पाए गए। इस धोखाधड़ी के बाद संबंधित दुकानदार का लाइसेंस तुरंत निरस्त कर दिया गया है।
सहकारी समिति में कालाबाजारी और रिकॉर्ड की हेराफेरी
प्रशासनिक जांच में केवल मिलावट ही नहीं, बल्कि भारी कालाबाजारी भी पकड़ी गई है।
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बीबीपुर सहकारी समिति: यहाँ से खाद की कालाबाजारी का अनोखा मामला सामने आया। एक किसान ने मात्र 4 बोरी खाद खरीदी थी, लेकिन समिति के रिकॉर्ड और किसान के खाते में 45 बोरी खाद चढ़ा दी गई।
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ओवररेटिंग का खेल: पतारा के कुशवाहा खाद भंडार में 750 रुपये वाली पोटाश की बोरी 1000 रुपये में बेची जा रही थी। वहीं, बिल्हौर के गणपति खाद भंडार में 266 रुपये की खाद 375 रुपये में बिकती मिली।
प्रशासन की सख्त चेतावनी
जिला कृषि अधिकारी के अनुसार, अब तक कुल 11 दुकानों में कालाबाजारी की पुष्टि हुई है। कुल 15 दुकानों पर कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि 22 अन्य नमूनों की जांच रिपोर्ट आना अभी बाकी है। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर और भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
मुख्य बिंदु:
नकली DAP: खाद में पोषक तत्व ‘शून्य’ मिले, सिर्फ मिट्टी भरी थी।
बड़ी कार्रवाई: 12 दुकानों और 1 सहकारी समिति समेत 15 के लाइसेंस निलंबित।
अवैध वसूली: निर्धारित दाम से 100 से 250 रुपये तक अधिक वसूली पकड़ी गई।
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