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छत्तीसगढ़ में ‘घर वापसी’ की लहर: सैकड़ों परिवारों ने अपनाया सनातन धर्म

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रायपुर. छत्तीसगढ़ में हाल के महीनों और विशेषकर जनवरी 2026 के शुरुआती हफ्तों में ‘घर वापसी’ (मूल धर्म में वापसी) की घटनाओं में काफी तेजी देखी गई है। राज्य के विभिन्न हिस्सों, खासकर बस्तर और मैदानी इलाकों से ऐसी कई खबरें सामने आई हैं जहाँ सैकड़ों लोगों ने ईसाई धर्म छोड़ वापस हिंदू/सनातन धर्म अपनाया है।

1. महासमुंद: 50 से अधिक परिवारों की वापसी (16 जनवरी 2026)

महासमुंद जिले के सरायपाली (कटंगपली) में एक बड़े आयोजन के दौरान 104 लोगों (लगभग 50 परिवार) ने सनातन धर्म में वापसी की।

  • मुख्य अतिथि: भाजपा नेता और ‘अखिल भारतीय घर वापसी’ अभियान के प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव

  • विशेष: जूदेव ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार वापस लौटने वालों के पैर पखार कर (धोकर) उनका स्वागत किया। यह कार्यक्रम ‘वैदिक श्रीराम कथा’ के पांचवें दिन आयोजित किया गया था।

2. कांकेर: चर्च लीडर और कई परिवारों की वापसी (दिसंबर 2025 – जनवरी 2026)

कांकेर जिला इस समय धर्मांतरण और घर वापसी का केंद्र बना हुआ है।

  • बड़े तेवड़ा घटना: दिसंबर के अंत में ग्राम बड़े तेवड़ा के एक चर्च लीडर महेंद्र बघेल ने शीतला मंदिर में पुजारियों की मौजूदगी में हिंदू धर्म में वापसी की।

  • अन्य गांव: जनवरी 2026 के पहले हफ्ते में ही अंतागढ़ ब्लॉक के सरंडी गांव और आसपास के क्षेत्रों से करीब 15 परिवारों के वापस लौटने की खबर है। पीढ़ापाल गांव में लगभग 200 लोगों के एक साथ वापसी की भी रिपोर्ट सामने आई है।

3. रायपुर: सामूहिक घर वापसी अभियान

राजधानी रायपुर में जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी नरेंद्राचार्य महाराज के सानिध्य में एक विशाल शिविर आयोजित किया गया।

  • आंकड़ा: इस कार्यक्रम में दावा किया गया कि लगभग 240 लोगों ने ईसाई धर्म छोड़कर हिंदू धर्म पुनः स्वीकार किया।

  • कारण: वापस लौटने वाले लोगों ने बताया कि उन्हें पूर्व में बीमारी ठीक करने या अन्य प्रलोभन देकर धर्मांतरित किया गया था।

4. जगदलपुर (बस्तर): 22 साल बाद वापसी (जनवरी 2026)

बस्तर संभाग के जगदलपुर में भी 3 परिवारों के 11 सदस्यों ने सनातन धर्म में वापसी की। विशेष बात यह है कि ये परिवार पिछले 22 वर्षों से ईसाई धर्म का पालन कर रहे थे।

घर वापसी की घटनाओं के मुख्य कारण और स्वरूप:

  • सांस्कृतिक चेतना: आदिवासी समुदायों में अपनी पारंपरिक मान्यताओं और पूर्वजों की संस्कृति को बचाने की मुहिम तेज हुई है।

  • जूदेव परिवार की भूमिका: दिलीप सिंह जूदेव द्वारा शुरू किया गया ‘पैर पखारने’ का अभियान उनके बेटे प्रबल प्रताप सिंह जूदेव द्वारा जोर-शोर से चलाया जा रहा है।

  • स्थानीय विरोध: कई गांवों में शव दफनाने या पारंपरिक रीति-रिवाजों को लेकर हुए विवादों के बाद धर्मांतरित परिवारों ने वापस मूल धर्म में आने का निर्णय लिया है।

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