अयोध्या. चैत्र नवरात्रि और हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत 2083) के पावन अवसर पर अयोध्या की धरती एक बार फिर इतिहास की साक्षी बनी। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के द्वितीय तल पर 150 किलोग्राम वजन वाले स्वर्ण जड़ित ‘श्रीराम यंत्र’ की शास्त्रोक्त विधि से स्थापना की। इस आध्यात्मिक अनुष्ठान के साथ ही भव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य आधिकारिक रूप से पूर्णता को प्राप्त कर गया है।
🔱 श्रीराम यंत्र: वैदिक विज्ञान और आस्था का संगम
यह यंत्र केवल एक धातु की पट्टिका नहीं, बल्कि ऊर्जा का केंद्र माना जा रहा है। इसके बारे में कुछ मुख्य तथ्य इस प्रकार हैं:
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वजन और निर्माण: यह यंत्र 150 किलो का है, जिस पर सोने की परत चढ़ाई गई है।
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वैदिक गणित: इसे कांची कामकोटि पीठ के मार्गदर्शन में वैदिक गणित और ‘बीज मंत्रों’ के आधार पर तैयार किया गया है।
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यात्रा: यह यंत्र तिरुपति देवस्थानम से एक लंबी रथयात्रा के बाद अयोध्या पहुंचा था, जिसे अब मंदिर के दूसरे तल पर ‘राम दरबार’ के समीप स्थापित किया गया है।
🇮🇳 “श्रीराम को नमन और भारत मां का वंदन एक समान”
राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन में राष्ट्रवाद और आध्यात्मिकता को जोड़ते हुए कहा कि अयोध्या की धूलि का स्पर्श करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा:
“21वीं सदी में हमारे समावेशी समाज और विकसित भारत का संकल्प ‘रामराज्य’ के आदर्शों में ही निहित है। 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य प्रभु श्री राम के आशीर्वाद से निश्चित ही सिद्ध होगा।”
उन्होंने मंदिर के प्रमुख पड़ावों—भूमिपूजन, प्राण प्रतिष्ठा और ध्वजारोहण—को भारतीय संस्कृति की ‘स्वर्णिम तिथियां’ करार दिया।
🛠️ ‘कर्मयोगियों’ का सम्मान और भव्य आयोजन
इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति ने उन 400 चुनिंदा शिल्पियों (श्रमिकों) को सम्मानित किया, जिन्होंने दिन-रात मेहनत कर इस भव्य मंदिर को साकार किया।
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अतिथि: कार्यक्रम में आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी (अम्मा), राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित करीब 6,000 गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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सुरक्षा: आयोजन के लिए अयोध्या में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, जिसमें 7,000 से अधिक जवान तैनात रहे।
🏛️ दिग्गज नेताओं के संबोधन के मुख्य बिंदु
| व्यक्तित्व | मुख्य वक्तव्य |
| योगी आदित्यनाथ (CM) | “जहां दुनिया युद्ध की विभीषिका झेल रही है, वहीं अयोध्या रामराज्य की शांति का अनुभव करा रही है।” |
| आनंदीबेन पटेल (राज्यपाल) | “राम मंदिर अब केवल एक देवालय नहीं, बल्कि ‘राष्ट्र मंदिर’ और वैश्विक चेतना का केंद्र बन चुका है।” |
| स्वामी गोविंद देव गिरी | “श्रीराम यंत्र की स्थापना के साथ 500 वर्षों की प्रतीक्षा और मंदिर निर्माण का संकल्प पूर्ण हुआ।” |
✨ निष्कर्ष: सांस्कृतिक पुनर्जागरण का उदय
श्रीराम यंत्र की स्थापना के साथ ही अयोध्या का मंदिर अब धार्मिक आस्था से ऊपर उठकर भारत की सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक संप्रभुता का प्रतीक बन गया है। राष्ट्रपति की इस यात्रा ने संदेश दिया है कि आधुनिक भारत अपनी विरासत को साथ लेकर ही ‘विकसित भारत’ की राह पर आगे बढ़ेगा।
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