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कुशीनगर में पराली की आग का तांडव: 400 एकड़ गन्ने की फसल जलकर खाक, दाने-दाने को मोहताज हुए किसान

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में सोमवार को पराली जलाने की एक छोटी सी लापरवाही ने बड़ा रूप धारण कर लिया। विशुनपुरा ब्लॉक के चार गांवों में देखते ही देखते करीब 400 एकड़ में खड़ी गन्ने की तैयार फसल जलकर राख हो गई। इस घटना ने सैकड़ों किसानों की साल भर की मेहनत और जमापूंजी को चंद घंटों में स्वाहा कर दिया है।

1. कैसे हुई घटना?

मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार दोपहर करीब 1:00 बजे विशुनपुरा ब्लॉक के माघी मठिया गांव के बधवा चवर में किसी ने पराली जलाई थी। तेज पछुआ हवाओं के कारण आग की लपटें बेकाबू हो गईं।

  • प्रभावित गांव: माघी मठिया, बंधवा, परगन छपरा और भूईसोहरा।

  • तबाही का मंजर: आग इतनी भीषण थी कि आसमान में धुएं का काला गुबार कई किलोमीटर दूर से देखा गया। स्थानीय ग्रामीणों ने करीब 3 घंटे तक खुद ही आग बुझाने का संघर्ष किया, लेकिन आग ने 400 एकड़ के दायरे को अपनी चपेट में ले लिया।

2. प्रशासन की प्रतिक्रिया और वर्तमान स्थिति

घटना की सूचना मिलते ही राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुँची।

  • निरीक्षण: लेखपाल अनंत सिंह, पूजा मद्धेशिया और सच्चिदानंद ने प्रभावित खेतों का दौरा किया है।

  • सर्वे: राजस्व टीम वर्तमान में नुकसान का विस्तृत सर्वे कर रही है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार क्षति का आंकड़ा करोड़ों में बताया जा रहा है।

  • गुस्सा: ग्रामीणों में प्रशासन और फायर ब्रिगेड के प्रति भारी आक्रोश है। किसानों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद फायर ब्रिगेड की टीम समय पर नहीं पहुँची।

3. मुआवजे की क्या है स्थिति?

किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल अब भरपाई का है। वर्तमान सरकारी प्रावधानों के अनुसार मुआवजे की स्थिति निम्नलिखित हो सकती है:

  • राजस्व सहायता (दैवीय आपदा): जिला प्रशासन लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर ‘दैवीय आपदा निधि’ के तहत राहत राशि का प्रस्ताव शासन को भेज सकता है।

  • गन्ना मिलों की भूमिका: चूंकि यह तैयार फसल थी, किसान मांग कर रहे हैं कि मिलें जले हुए गन्ने की पेराई को प्राथमिकता दें, ताकि कुछ तो रिकवरी हो सके। हालांकि, जले हुए गन्ने में चीनी की मात्रा (रिकवरी) कम होने से किसानों को उचित दाम मिलने में कठिनाई आती है।

  • दोषियों पर कार्रवाई: प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जिस व्यक्ति ने पराली जलाई थी, उस पर भारी जुर्माना (₹15,000 तक) और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। उत्तर प्रदेश सरकार के नियमों के अनुसार, पराली जलाना प्रतिबंधित है।

4. किसानों की मांग

पीड़ित किसान इम्तेयाज, विमलेंद्र मिश्र और ग्राम प्रधान प्रभाष चंद मिश्र सहित सैकड़ों किसानों ने सरकार से विशेष राहत पैकेज की मांग की है। किसानों का कहना है कि “यह सिर्फ फसल नहीं जली, बल्कि हमारी बेटियों की शादी और बच्चों की पढ़ाई के सपने जल गए हैं।”

किसानों के लिए सुझाव

यदि आपकी फसल का बीमा (PMFBY) है, तो 72 घंटे के भीतर इसकी सूचना संबंधित बैंक या कृषि विभाग को अवश्य दें। साथ ही, जले हुए गन्ने की तत्काल कटाई कर मिलों को भेजने का प्रयास करें, क्योंकि देरी होने पर गन्ने का वजन और गुणवत्ता दोनों तेजी से घटते हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।