शनिवार, जनवरी 31 2026 | 02:29:17 PM
Breaking News
Home / राज्य / उत्तरप्रदेश / IIT कानपुर में फिर आत्महत्या: PhD छात्र ने छठी मंजिल से कूदकर दी जान, 1 साल में 5वीं घटना

IIT कानपुर में फिर आत्महत्या: PhD छात्र ने छठी मंजिल से कूदकर दी जान, 1 साल में 5वीं घटना

Follow us on:

आईआईटी कानपुर में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और छात्र परामर्श के लिए प्रतीकात्मक चित्र

लखनऊ. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर में पिछले कुछ समय से छात्रों द्वारा आत्महत्या की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। आज, 21 जनवरी 2026 को भी संस्थान के एक पीएचडी (PhD) स्कॉलर द्वारा आत्महत्या का दुखद मामला सामने आया है।

आईआईटी कानपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पिछले 12 महीनों में यह 5वीं और पिछले दो वर्षों में 9वीं आत्महत्या की घटना है। इन घटनाओं ने संस्थान के ‘सपोर्ट सिस्टम’ और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

1. हालिया घटना (20-21 जनवरी 2026)

  • विवरण: राजस्थान के चुरू जिले के रहने वाले रामस्वरूप इशराम (25 वर्ष), जो अर्थ साइंसेज विभाग में पीएचडी के छात्र थे, ने मंगलवार दोपहर कैंपस के पीएचडी अपार्टमेंट की छठी मंजिल से कूदकर जान दे दी।

  • पारिवारिक पृष्ठभूमि: वह अपनी पत्नी और दो साल की बेटी के साथ कैंपस में ही रहते थे।

  • कारण: प्रारंभिक जांच और पुलिस के अनुसार, रामस्वरूप लंबे समय से डिप्रेशन और एंजायटी (Anxiety) से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था। मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।

2. पिछले एक साल का दुखद घटनाक्रम

पिछले एक साल में हुई कुछ प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:

  • दिसंबर 2025: अजमेर (राजस्थान) के रहने वाले बीटेक फाइनल ईयर के छात्र जय सिंह मीणा ने हॉस्टल रूम में फांसी लगाकर जान दी। उन्होंने नोटबुक में ‘Sorry Everyone’ लिखा था।

  • अक्टूबर 2025: हरियाणा के बीटेक छात्र धीरज सैनी का शव उनके हॉस्टल रूम में मिला था।

  • फरवरी 2025: नोएडा के रहने वाले केमिस्ट्री के पीएचडी छात्र अंकित यादव ने आत्महत्या की। वे यूजीसी फेलोशिप पर शोध कर रहे थे।

  • जनवरी 2024: झारखंड की पीएचडी छात्रा प्रियंका जायसवाल ने कैंपस में फांसी लगाकर आत्महत्या की थी।

3. आत्महत्या के पीछे के प्रमुख कारण

विभिन्न रिपोर्टों और विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:

  • अकादमिक दबाव: शोध कार्यों (PhD) में देरी, डिग्री अटकना और उच्च प्रतिस्पर्धात्मक माहौल।

  • मानसिक स्वास्थ्य: गंभीर एंजायटी और डिप्रेशन, जिसका समय पर उचित समाधान न मिल पाना।

  • आर्थिक तनाव: स्कॉलरशिप और फेलोशिप मिलने में देरी के कारण उत्पन्न वित्तीय परेशानियां।

  • संस्थागत जिम्मेदारी: छात्रों का आरोप है कि प्रशासन और शिक्षकों के साथ संवाद की कमी और बिखरे हुए नियम तनाव बढ़ाते हैं।

4. संस्थान द्वारा उठाए गए कदम

बढ़ती घटनाओं को देखते हुए आईआईटी प्रशासन ने कुछ सुधारात्मक प्रयास शुरू किए हैं:

  • Centre for Mental Wellness: संस्थान ने एक विशेष केंद्र स्थापित किया है जहाँ क्लिनिकल और नॉन-क्लिनिकल परामर्श की सुविधा है।

  • Anonymous Helpline: छात्रों के लिए एक गुमनाम हेल्पलाइन सेवा शुरू की गई है।

  • Gatekeeper Training: फैकल्टी और स्टाफ को छात्रों में आत्महत्या के शुरुआती लक्षणों को पहचानने के लिए विशेष प्रशिक्षण (SPIF के साथ मिलकर) दिया जा रहा है।

  • Open House: छात्रों की समस्याओं को सुनने के लिए समय-समय पर ‘ओपन हाउस’ चर्चा आयोजित की जाती है।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

कानपुर में बदला मौसम का मिजाज: अगले 48 घंटों में बारिश का अलर्ट, जानें उत्तर भारत में ठंड का हाल

लखनऊ. उत्तर भारत में जारी कड़ाके की ठंड के बीच अब मौसम एक बार फिर …