लोड हो रहा है...

KGMU लखनऊ: फर्जी डॉक्टर बनकर छात्राओं को जाल में फंसाने वाला युवक गिरफ्तार, धर्मांतरण रैकेट का संदेह

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ । बुधवार, 22 अप्रैल 2026

उत्तर प्रदेश की राजधानी स्थित प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। मंगलवार को संस्थान के छात्रों ने एक ऐसे युवक को दबोचा जो सफेद एप्रन पहनकर और खुद को डॉक्टर बताकर कैंपस में घूम रहा था। आरोपी की पहचान हसम अहमद के रूप में हुई है, जिस पर छात्राओं को बहलाने-फुसलाने और कथित तौर पर धर्मांतरण गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।

प्रमुख घटनाक्रम और जांच के बिंदु

  • पकड़ा जाना: आरोपी पिछले कुछ समय से केजीएमयू परिसर में सक्रिय था। वह खुद को वरिष्ठ डॉक्टर बताकर जूनियर छात्रों और छात्राओं पर रौब झाड़ता था। छात्रों को उसकी गतिविधियों पर शक हुआ, जिसके बाद उसे सर्जरी विभाग के पास घेराबंदी कर पकड़ा गया।

  • AIIMS का झांसा: जांच में सामने आया है कि आरोपी ने छात्राओं को AIIMS दिल्ली में एक मेडिकल कॉन्फ्रेंस में ले जाने का प्रलोभन दिया था।

  • कैंप और नेटवर्क: बताया जा रहा है कि पुराने लखनऊ के एक इलाके में एक स्वास्थ्य कैंप आयोजित किया गया था, जिसमें केजीएमयू की कुछ छात्राओं को शामिल होने के लिए प्रेरित किया गया। पुलिस अब उस कैंप के आयोजकों और हसम अहमद के संबंधों की जांच कर रही है।

  • धर्मांतरण का आरोप: छात्रों और कुछ संगठनों ने आरोप लगाया है कि आरोपी का मकसद केवल धोखाधड़ी नहीं, बल्कि छात्राओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें धर्मांतरण के लिए उकसाना था।

matribhumisamachar.com/

प्रशासनिक प्रतिक्रिया

केजीएमयू के प्रवक्ता प्रोफेसर के. के. सिंह ने पुष्टि की है कि युवक संस्थान का हिस्सा नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया है। पुलिस अब आरोपी के मोबाइल डेटा और संपर्कों की पड़ताल कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस साजिश में उसके साथ और कौन लोग शामिल हैं।

हाल ही में केजीएमयू में एक अन्य मामला डॉ. रमीज से संबंधित भी चर्चा में रहा था, जिस पर जबरन धर्मांतरण और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे थे। प्रशासन इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या हसम अहमद का उस पुराने मामले या किसी सक्रिय नेटवर्क से कोई संबंध है। सुरक्षा की दृष्टि से अब कैंपस में बाहरी लोगों के प्रवेश और आई-कार्ड की जांच को लेकर सख्त गाइडलाइंस जारी की जा रही हैं।

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।