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क्या मोटापा बन रहा है आपके माता-पिता बनने में बाधा? स्वास्थ्य रिपोर्ट 2026

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नई दिल्ली. 2026 में मोटापा एक वैश्विक महामारी (Epidemic) का रूप ले चुका है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में मोटापे की दर चिंताजनक रूप से बढ़ी है, जिसका सीधा असर प्रजनन क्षमता (Fertility) पर पड़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मोटापा केवल डायबिटीज या बीपी की बीमारी नहीं है, बल्कि यह बांझपन (Infertility) की भी मुख्य जड़ है।

1. 2026 में क्यों बढ़ रहे हैं आंकड़े?

हालिया शोध और डेटा बताते हैं कि 2026 में मोटापे के आंकड़े बढ़ने के पीछे कई नए और पुराने कारण हैं:

  • अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता चलन: बाजार में सस्ते और आसानी से उपलब्ध ‘रेडी-टू-ईट’ भोजन में शुगर और सैचुरेटेड फैट की अधिकता ने युवाओं में मोटापे को बढ़ावा दिया है।

  • डिजिटल लाइफस्टाइल और गतिहीनता: वर्क-फ्रॉम-होम कल्चर और स्क्रीन टाइम बढ़ने के कारण शारीरिक सक्रियता में भारी कमी आई है।

  • तनाव और नींद की कमी: 2026 की जीवनशैली में मानसिक तनाव और अनियमित नींद चक्र (Sleep Cycle) हॉर्मोनल असंतुलन पैदा कर रहे हैं, जिससे ‘स्ट्रेस ईटिंग’ की प्रवृत्ति बढ़ी है।

2. मोटापा और बांझपन: गहरा कनेक्शन

मोटापा शरीर की अंतःस्रावी प्रणाली (Endocrine System) को बाधित करता है, जो सीधे तौर पर प्रजनन अंगों को प्रभावित करता है।

महिलाओं पर प्रभाव:

  • PCOS/PCOD का खतरा: मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ जाता है, जो PCOS का मुख्य कारण है। इससे ओव्यूलेशन प्रक्रिया रुक जाती है।

  • हॉर्मोनल गड़बड़ी: शरीर में फैट की अधिकता एस्ट्रोजन (Estrogen) हॉर्मोन के स्तर को बिगाड़ देती है, जिससे गर्भधारण में कठिनाई होती है।

  • IVF की कम सफलता: अधिक वजन वाली महिलाओं में सहायक प्रजनन तकनीकों (ART) जैसे IVF के सफल होने की संभावना काफी कम हो जाती है।

पुरुषों पर प्रभाव:

  • स्पर्म क्वालिटी में गिरावट: अधिक वजन के कारण टेस्टोस्टेरोन का स्तर गिर जाता है और शुक्राणुओं की संख्या (Sperm Count) व उनकी गतिशीलता कम हो जाती है।

  • एरेक्टाइल डिस्फंक्शन: मोटापे से रक्त संचार प्रभावित होता है, जिससे यौन स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा होती हैं।

3. बांझपन से बचने के उपाय (2026 गाइडलाइन्स)

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और स्थानीय विशेषज्ञों ने कुछ बचाव के तरीके सुझाए हैं:

श्रेणी उपाय
आहार घर का बना ताजा भोजन करें, चीनी और पैकेट बंद जूस से बचें।
व्यायाम प्रतिदिन कम से कम 30-45 मिनट मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि (पैदल चलना, योग)।
नींद रात में 7-8 घंटे की गहरी नींद सुनिश्चित करें।
वजन प्रबंधन अपने BMI को 18.5 से 24.9 के बीच बनाए रखने की कोशिश करें।

डॉक्टरों का कहना है कि अगर आप केवल 5% से 10% वजन कम कर लेते हैं, तो आपकी प्रजनन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है और ओव्यूलेशन प्रक्रिया फिर से सामान्य हो सकती है।

नोट : अंतिम निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें.

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