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SRIVANI Trust का पैसा शिरडी साईं बाबा के मंदिरों पर क्यों नहीं होगा खर्च? देवस्थानम मंत्री ने दी बड़ी सफाई

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अमरावती । मंगलवार, 23 जून 2026

आंध्र प्रदेश के धार्मिक और मंदिर प्रबंधन क्षेत्र से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। आंध्र प्रदेश के देवस्थानम और वरिष्ठ मंत्री ए. रामनारायण रेड्डी ने सोमवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह साफ कर दिया है कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के ‘श्रीवाणी ट्रस्ट’ (SRIVANI Trust) के फंड का इस्तेमाल शिरडी साईं बाबा के मंदिरों के निर्माण या उनके रखरखाव के लिए नहीं किया जाएगा।

इस निर्णय के पीछे के गहरे धार्मिक और शास्त्रीय कारणों को स्पष्ट करते हुए मंत्री ने कहा कि यह कदम पूरी तरह से सनातन परंपरा के नियमों के तहत उठाया गया है।

शास्त्रों के मानकों का हवाला: क्यों नहीं मिलेगा साईं मंदिरों को फंड?

प्रेस वार्ता के दौरान देवस्थान विभाग की पिछले दो साल की उपलब्धियों का ब्यौरा देते हुए मंत्री ए. रामनारायण रेड्डी ने कहा कि हिंदू मंदिरों से आने वाली दान राशि को केवल उन्हीं धार्मिक स्थलों पर खर्च किया जा सकता है, जो पूरी तरह से ‘हिंदू शास्त्र के मानकों’ का पालन करते हैं।

उन्होंने इसके मुख्य कारण इस प्रकार बताए:

  1. आदि देवताओं में उल्लेख नहीं: प्राचीन हिंदू शास्त्रों और वैदिक ग्रंथों में शिरडी साईं बाबा का उल्लेख सनातन धर्म के आदि (शुरुआती) देवताओं के रूप में नहीं है।

  2. वैदिक कार्यक्रमों का संचालन: शिरडी साईं बाबा के मंदिरों में होने वाले अनुष्ठान और कार्यक्रम पारंपरिक हिंदू शास्त्रों के पूर्ण वैदिक मानकों के अनुसार संचालित नहीं होते हैं। यही कारण है कि ये मंदिर देवस्थान विभाग के बजटीय दायरे में नहीं आते हैं।

भक्तों की आस्था का सम्मान: मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि, “शिरडी साईं बाबा के देश और दुनिया में करोड़ों हिंदू और गैर-हिंदू भक्त मौजूद हैं, जो बेहद सक्षम हैं। उनके सामूहिक सहयोग से ये मंदिर अपने स्तर पर पहले से ही बेहतरीन तरीके से विकसित और संचालित हो रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि ‘श्रीवाणी ट्रस्ट’ का गठन विशेष रूप से पूरे भारत में भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी (तिरुपति बालाजी) के मंदिरों के निर्माण, जीर्णोद्धार और उनके रखरखाव के लिए किया गया है, इसलिए इस पैसे को तय मानकों के अनुसार ही खर्च किया जाएगा।

आंध्र प्रदेश मंदिर विकास: बजट आवंटन और योजनाएं (2026)

आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य के प्राचीन और उपेक्षित मंदिरों के कायाकल्प के लिए कई बड़े वित्तीय फैसलों की घोषणा की है। सरकार के मुख्य आवंटन नीचे दी गई तालिका में देखे जा सकते हैं:

योजना / विकास कार्य स्वीकृत बजट राशि लक्ष्य और मुख्य विवरण
सर्वश्रेयोनिधि योजना ₹813 करोड़ राज्य के 692 उपेक्षित प्राचीन मंदिरों का कायाकल्प और विकास।
श्रीवाणी भजन मंदिर योजना ₹750 करोड़ TTD के सहयोग से पूरे आंध्र प्रदेश में 5,000 नए भजन मंदिरों का निर्माण।
भजन मंदिर (प्रथम चरण) ₹267 करोड़ पहले चरण के तहत 1,270 भजन मंदिरों के निर्माण को तत्काल मंजूरी।
धूप दीप नैवेद्यम योजना ₹73 करोड़ 6,137 छोटे मंदिरों के लिए वार्षिक बजट ₹35 करोड़ से बढ़ाकर दोगुना किया गया।
गोदावरी पुष्करालू तैयारी ₹72 करोड़ कुंभ मेले की तर्ज पर बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 162 कार्य शुरू।

4.5 लाख एकड़ मंदिर भूमि की सुरक्षा के लिए ब्लॉकचेन तकनीक

मंत्री रेड्डी ने एक और क्रांतिकारी कदम की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य के 22,672 मंदिरों के स्वामित्व वाली लगभग 4.5 लाख एकड़ की विशाल भूमि को भू-माफियाओं और अवैध कब्जों से सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने ब्लॉकचेन आधारित डिजिटलीकरण (Blockchain-based Digitization) प्रक्रिया की शुरुआत कर दी है। इस तकनीक के आने से मंदिर की जमीनों के रिकॉर्ड के साथ कोई भी छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी।

इसके अलावा, राज्य के 111 प्रमुख मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त भोजन की व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है। वर्तमान में सालाना 3 करोड़ श्रद्धालुओं को मुफ्त ‘अन्नप्रसादम’ वितरित किया जा रहा है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि पिछले दो वर्षों में मुख्य आस्था केंद्रों पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में 70 प्रतिशत का भारी उछाल देखा गया है।

गोदावरी पुष्करालू 2027 की तारीख घोषित

आंध्र प्रदेश के सबसे बड़े धार्मिक उत्सवों में से एक ‘गोदावरी पुष्करालू’ को लेकर भी मंत्री ने महत्वपूर्ण प्रशासनिक अपडेट साझा किया। उन्होंने आधिकारिक घोषणा की कि आगामी गोदावरी पुष्करालू का भव्य आयोजन 26 जून 2027 से शुरू होगा। इसके लिए ₹72 करोड़ की लागत से घाटों की मरम्मत, सड़कों के चौड़ीकरण और सुरक्षा व्यवस्था जैसे 162 विकास कार्यों को समय से पहले पूरा करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

तिरुपति और भगवान वेंकटेश्वर के प्रति देश-विदेश के श्रद्धालुओं और मशहूर हस्तियों की गहरी आस्था हमेशा से रही है। उदाहरण के लिए, तिरुमाला के आध्यात्मिक महत्व और यहां की कठिन यात्रा परंपरा को रेखांकित करते हुए आप हाल ही का एक विवरण पढ़ सकते हैं कि कैसे प्रसिद्ध हस्तियां भी वीआईपी विशेषाधिकार छोड़ आम भक्तों की तरह इस पावन भूमि पर शीश नवाती हैं; विस्तृत जानकारी के लिए Matribhumi Samachar English पर जन्हवी कपूर की तिरुपति यात्रा का यह लेख देख सकते हैं।

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