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क्या मिडिल ईस्ट में शुरू होने वाला है महायुद्ध? एयर फ्रांस और KLM की उड़ानें रद्द, भारत पर मंडराया आर्थिक संकट

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एयर फ्रांस (Air France) विमान और इजराइल का झंडा।

पेरिस. मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा नजर आ रहा है। ईरान और अमेरिका-इजराइल गठबंधन के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को देखते हुए दुनिया की दो बड़ी विमानन कंपनियों, एयर फ्रांस (Air France) और KLM ने इजराइल, दुबई और सऊदी अरब के लिए अपनी सभी उड़ानें तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिकी सेना का एक विशाल बेड़ा (Armada) खाड़ी क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है।

✈️ एयरलाइंस का फैसला: आसमान में ‘नो-फ्लाई ज़ोन’ जैसा माहौल

सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए एयर फ्रांस-KLM ग्रुप ने शनिवार को घोषणा की कि वे फिलहाल ईरान, इराक और इजराइल के हवाई क्षेत्र (Airspace) का उपयोग नहीं करेंगे।

  • प्रभावित रूट: तेल अवीव (इजराइल), दुबई (UAE), रियाद और दम्मम (सऊदी अरब) की उड़ानें निलंबित कर दी गई हैं।

  • लफ्थांसा (Lufthansa) का रुख: जर्मन एयरलाइन लफ्थांसा ने भी इजराइल के लिए अपनी नाइट फ्लाइट्स को जनवरी के अंत तक बंद कर दिया है।

💣 क्या बड़े युद्ध की शुरुआत होने वाली है?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार स्थिति 2024 के तनाव से कहीं अधिक गंभीर है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:

  1. अमेरिकी सैन्य जमावड़ा: राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में अमेरिकी नौसेना के ‘USS अब्राहम लिंकन’ एयरक्राफ्ट कैरियर को खाड़ी क्षेत्र में तैनात किया है। इसे ईरान के खिलाफ एक सीधी चेतावनी माना जा रहा है।

  2. ईरान का रुख: ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उस पर हमला हुआ, तो वह ‘होरमुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को बंद कर सकता है, जहाँ से दुनिया का 20% तेल गुजरता है।

  3. इजराइल की हाई अलर्ट स्थिति: इजराइली रक्षा बल (IDF) किसी भी संभावित ड्रोन या मिसाइल हमले का जवाब देने के लिए ‘वॉर मोड’ में हैं।

🇮🇳 भारत पर इसका आर्थिक असर (Impact on India)

भारत के लिए यह संकट केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सीधे तौर पर आर्थिक है:

  • तेल की कीमतों में आग: यदि युद्ध छिड़ता है, तो कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। इससे भारत में पेट्रोल-डीजल और परिवहन महंगा होगा, जिससे सीधे महंगाई बढ़ेगी।

  • शेयर बाजार में गिरावट: अनिश्चितता के चलते विदेशी निवेशक भारतीय बाजार (Sensex/Nifty) से पैसा निकाल सकते हैं, जैसा कि पिछले दो दिनों के उतार-चढ़ाव में देखा गया है।

  • निर्यात और शिपिंग लागत: लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में तनाव से माल ढुलाई (Freight) का खर्च 15-20% तक बढ़ सकता है, जिससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को नुकसान होगा।

  • प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा: गल्फ देशों में रहने वाले लगभग 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा और वहां से आने वाला ‘रेमिटेंस’ (Remittance) भी खतरे में पड़ सकता है।

 

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