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बिहार में राजस्व अधिकारियों की ‘आर-पार’ की जंग: सरकार ने दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम, 25 मार्च शाम 5 बजे के बाद होगी ‘सेवा मुक्ति’

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पटना | 24 मार्च, 2026

बिहार में पिछले 15 दिनों से जारी राजस्व अधिकारियों की हड़ताल पर राज्य सरकार ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अख्तियार किया है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मंगलवार को हड़ताली अधिकारियों को ‘अंतिम चेतावनी’ देते हुए 25 मार्च, शाम 5 बजे तक काम पर लौटने का आदेश दिया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इस समयसीमा के बाद भी अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों पर ‘सेवा टूट’ (Service Break) की कार्रवाई की जाएगी और उनकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं।

क्यों भड़की है हड़ताल की आग?

बिहार राजस्व सेवा के अधिकारी (अंचलाधिकारी और राजस्व अधिकारी) 9 मार्च, 2026 से सामूहिक अवकाश पर हैं। उनकी मुख्य मांग भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) के पदों पर राजस्व सेवा के अधिकारियों की ही तैनाती सुनिश्चित करना है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार के हालिया फैसलों से उनके कैडर के हितों की अनदेखी हो रही है।

सरकार की चेतावनी के 5 बड़े बिंदु:

  1. सेवा समाप्ति का खतरा: 25 मार्च शाम 5 बजे तक योगदान नहीं देने वालों की नौकरी जा सकती है।

  2. वेतन कटौती: हड़ताल की अवधि का वेतन काटा जाएगा और इसे ‘डाईज-नॉन’ (No Work No Pay) माना जाएगा।

  3. सामूहिक अवकाश अवैध: सरकार ने इस हड़ताल को नियमों के विरुद्ध और प्रशासनिक व्यवस्था को ठप करने की साजिश करार दिया है।

  4. आम जनता की परेशानी: दाखिल-खारिज (Mutation) और प्रमाण पत्र जैसे कार्यों के 46 लाख से अधिक आवेदन लंबित हो गए हैं।

  5. नरम रुख का विकल्प: समय सीमा के भीतर लौटने वालों के अवकाश के समायोजन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता है।

आम जनता पर संकट: 46 लाख फाइलें अटकीं

इस हड़ताल का सबसे बुरा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। जमीन के दस्तावेजों के सुधार, दाखिल-खारिज और परिमार्जन जैसे महत्वपूर्ण कार्य पूरी तरह ठप हैं। आंकड़ों के अनुसार, पूरे बिहार में लगभग 46 लाख आवेदन लंबित पड़े हैं, जिससे किसानों और आम लोगों को भारी कठिनाई हो रही है।

डिप्टी सीएम का सख्त संदेश

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा,

“मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ और ‘भूमि सुधार जनकल्याण संवाद’ जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम पाइपलाइन में हैं। ऐसे समय में अधिकारियों का कार्य से गायब रहना न केवल लापरवाही है, बल्कि जनता के साथ विश्वासघात है। हम प्रशासनिक व्यवस्था और जनहित से कोई समझौता नहीं करेंगे।”

आगे क्या?

हड़ताल के कारण उत्पन्न संकट को देखते हुए सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर अंचलों का प्रभार प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) को सौंपना शुरू कर दिया है। साथ ही, सेवानिवृत्त अधिकारियों की मदद लेने पर भी विचार किया जा रहा है। अब सबकी नजरें 25 मार्च की शाम 5 बजे पर टिकी हैं—क्या अधिकारी झुकेंगे या सरकार अपनी चेतावनी को हकीकत में बदलेगी?

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