गुरुवार, अप्रैल 23 2026 | 10:12:50 AM
Breaking News
Home / राज्य / बिहार / ‘नौकरी के बदले जमीन’ मामला: लालू यादव को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका, याचिका खारिज

‘नौकरी के बदले जमीन’ मामला: लालू यादव को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका, याचिका खारिज

Follow us on:

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की फाइल फोटो।

पटना | मंगलवार, 24 मार्च 2026

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने चर्चित ‘नौकरी के बदले जमीन’ (Land-for-Job) मामले में उन्हें कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने सीबीआई (CBI) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर और दाखिल किए गए आरोपपत्रों (Charge Sheets) को रद्द करने की उनकी याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

कोर्ट का कड़ा रुख: “याचिका में दम नहीं”

यह महत्वपूर्ण फैसला जस्टिस रविंद्र दुडेजा की एकल पीठ ने सुनाया। लालू यादव ने अपनी याचिका में मांग की थी कि वर्ष 2022, 2023 और 2024 में सीबीआई द्वारा दायर किए गए तीनों आरोपपत्रों और ट्रायल कोर्ट द्वारा उन पर लिए गए संज्ञान (Cognizance) के आदेशों को रद्द किया जाए। हालांकि, हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए इस स्तर पर हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।

कानूनी पेंच: क्या थी लालू यादव की दलील?

लालू यादव के वकीलों ने अदालत में मुख्य रूप से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 17A का हवाला दिया था। उनकी दलील थी कि:

  1. CBI ने जांच शुरू करने और चार्जशीट दाखिल करने से पहले सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक पूर्व मंजूरी (Prior Sanction) नहीं ली थी।

  2. बिना मंजूरी के की गई पूरी कानूनी कार्रवाई अवैध है और इसे तुरंत निरस्त किया जाना चाहिए।

अदालत का फैसला: हाई कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और माना कि जांच की प्रक्रिया में किसी भी कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन नहीं हुआ है जो एफआईआर को रद्द करने का आधार बन सके।

क्या है पूरा मामला? (Background)

यह घोटाला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 के बीच केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे।

  • आरोप: भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन (जबलपुर) में ग्रुप-डी के पदों पर नियुक्तियों के बदले उम्मीदवारों से जमीन ली गई।

  • कार्यप्रणाली: आरोप है कि जिन लोगों को नौकरी दी गई, उन्होंने अपनी कीमती जमीनें लालू यादव के परिवार के सदस्यों या उनकी करीबी कंपनियों (जैसे ए.के. इंफोसिस्टम्स) के नाम पर बेहद मामूली कीमतों पर ट्रांसफर कीं।

  • आरोपी: CBI ने 18 मई 2022 को इस मामले में केस दर्ज किया था, जिसमें लालू यादव के साथ-साथ उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती और परिवार के अन्य सदस्यों को भी नामजद किया गया है।

क्या हैं आगे के रास्ते?

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब ट्रायल कोर्ट में मामले की सुनवाई की रफ्तार तेज होने की संभावना है।

विशेषज्ञों की राय: कानूनी जानकारों का मानना है कि लालू यादव के पास अब केवल सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने का विकल्प बचा है। यदि वहां से भी राहत नहीं मिलती है, तो उन्हें और उनके परिवार को नियमित अदालती सुनवाई और मुकदमे का सामना करना होगा।

मुख्य बिंदु:

  • जस्टिस रविंद्र दुडेजा की पीठ ने याचिका को ‘मेरिट’ विहीन बताते हुए किया खारिज।

  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत ‘पूर्व मंजूरी’ की दलील नहीं आई काम।

  • रेल मंत्री रहते हुए ग्रुप-डी की नियुक्तियों के बदले जमीन लेने का है गंभीर आरोप।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

गयाजी में भक्ति का सैलाब: 15 साल बाद विष्णुपद मंदिर में लक्ष्मी नारायण महायज्ञ शुरू, 501 कलशों के साथ निकली भव्य शोभायात्रा

पटना | रविवार, 19 अप्रैल 2026 मोक्षनगरी गया के विश्व प्रसिद्ध श्री विष्णुपद मंदिर परिसर …