गुरुवार, सितंबर 17 2026 | 11:20:11 PM

मुरादाबाद दोहरा हत्याकांड: महज 40 हजार के विवाद में उजाड़ दिया हंसता-खेलता परिवार, मुठभेड़ के बाद मुख्य आरोपी गिरफ्तार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ  शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के नागफनी थाना क्षेत्र में हुए राजा और उनकी पत्नी फराह की निर्मम हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। एसएसपी सतपाल अंतिल के निर्देशन में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 25-25 हजार रुपये के इनामी मुख्य आरोपी फरजंद और उसके चचेरे भाई सुहैल को एक मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है।

कैसे हुई मुठभेड़?

गुरुवार की देर शाम पुलिस को आरोपियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। घेराबंदी के दौरान आरोपियों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों आरोपियों के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने अब तक इस मामले में चार मुख्य आरोपियों को जेल भेज दिया है, जबकि दो अन्य की तलाश जारी है।

उत्तर प्रदेश मुख्य समाचार

विवाद की खौफनाक वजह: कमरे का सौदा

इस हत्याकांड के पीछे की कहानी बेहद चौंकाने वाली है। जानकारी के अनुसार, मृतक राजा ने आरोपी फहीम से 2.26 लाख रुपये में एक कमरा खरीदा था। राजा ने ईमानदारी से 2 लाख रुपये का भुगतान कर दिया था। केवल 24 हजार रुपये शेष थे, लेकिन लालच में आकर आरोपी पक्ष ने अचानक नए रेट का हवाला देते हुए 40 हजार रुपये अतिरिक्त की मांग शुरू कर दी। इसी विवाद ने सोमवार की रात खूनी रूप ले लिया।

क्रूरता की हदें पार

सोमवार रात जब फरजंद, सुहैल और अनस घर में घुसे, तो उन्होंने दया की सारी सीमाएं लांघ दीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार:

  • राजा के शरीर पर चाकू के 40 गहरे निशान मिले।

  • पत्नी फराह को बचाने की कोशिश में 6 बार चाकू से गोदा गया।

    दंपती की चीखें सुनने वाला कोई नहीं था और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

क्राइम डायरी मुरादाबाद

पुलिस की सक्रियता और इनाम

वारदात के बाद एसएसपी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फरार आरोपियों पर इनाम घोषित किया था। पुलिस ने फहीम को पहले ही पकड़ लिया था, जबकि अनस मंगलवार रात मुठभेड़ में पकड़ा गया। अब मुख्य आरोपी फरजंद की गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरिफ और नवाब की तलाश में जुटी है।

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।