नई दिल्ली । बुधवार, 24 जून 2026
भारत की सबसे बड़ी सरकारी तेल और गैस खोजकर्ता कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बहुत बड़ा रणनीतिक दांव खेलने जा रही है। अपनी विदेशी शाखा ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) के माध्यम से, कंपनी वेनेजुएला में मौजूद दो प्रमुख तेल क्षेत्रों (Oil Fields) का ऑपरेशनल और वित्तीय नियंत्रण पूरी तरह से अपने हाथों में लेने के लिए बातचीत कर रही है।
इस मास्टरप्लान के तहत ओएनजीसी, वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA (Petróleos de Venezuela S.A.) की हिस्सेदारी खरीदने की प्रक्रिया में है। हालांकि, इस महत्वपूर्ण सौदे को पूरी तरह अमलीजामा पहनाने के लिए भारत को अमेरिकी प्रशासन की हरी झंडी और विशेष लाइसेंस का इंतजार है।
क्या है ONGC का वेनेजुएला मास्टरप्लान?
ओएनजीसी वेनेजुएला के दो सबसे बड़े ऑनशोर तेल परिसंपत्तियों (Onshore Assets) में पहले से ही हिस्सेदार है। लेकिन अब कंपनी अपनी भूमिका को केवल एक ‘साइलेंट पार्टनर’ से बदलकर ‘ऑपरेटर’ के रूप में स्थापित करना चाहती है।
1. सैन क्रिस्टोबाल प्रोजेक्ट (San Cristobal Oilfield)
यह प्रोजेक्ट ओरिनोको बेल्ट (Orinoco Belt) में स्थित है।
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वर्तमान स्थिति: यहाँ ओएनजीसी विदेश (OVL) के पास 40% हिस्सेदारी है, जबकि शेष 60% हिस्सेदारी वेनेजुएला की PDVSA के पास है।
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मास्टरप्लान: ओएनजीसी यहाँ PDVSA की हिस्सेदारी खरीदकर इस तेल क्षेत्र की एकमात्र ऑपरेटर (Sole Operator) बनना चाहती है ताकि पूरा नियंत्रण भारत के पास हो।
2. काराबोबो-1 प्रोजेक्ट (Carabobo-1)
यह पूर्वी ओरिनोको क्षेत्र का एक बड़ा तेल ब्लॉक है।
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वर्तमान स्थिति: यहाँ ओएनजीसी के पास 11% हिस्सेदारी है। अन्य भारतीय कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के पास 3.5% और ऑयल इंडिया (Oil India) के पास 3.5% हिस्सेदारी है। स्पेन की दिग्गज कंपनी रेपसोल (Repsol) के पास 11% और PDVSA के पास 71% हिस्सेदारी है।
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मास्टरप्लान: ओएनजीसी यहाँ स्पेन की Repsol के साथ मिलकर संयुक्त रूप से परिचालन नियंत्रण (Joint Operational Control) संभालना चाहती है।
अमेरिकी मंजूरी (US License) क्यों है सबसे बड़ी शर्त?
वेनेजुएला की राजनीति में बड़े उलटफेर और जनवरी में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद हिरासत में लिए जाने के बाद से, वहाँ के तेल उद्योग पर अमेरिकी ट्रेजरी विभाग (US Treasury Department) का कड़ा नियंत्रण है।
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विशेष लाइसेंस की अनिवार्यता: किसी भी विदेशी कंपनी को वेनेजुएला से तेल निकालने, उसकी अंतरराष्ट्रीय बिक्री करने या वित्तीय लेनदेन (Financial Transactions) करने के लिए अमेरिकी प्रशासन से विशेष लाइसेंस लेना आवश्यक है।
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वैश्विक कंपनियों को राहत: ओएनजीसी लगातार अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में है। राहत की बात यह है कि अमेरिका पहले ही Chevron, BP, Shell, और Repsol जैसी दिग्गज वैश्विक कंपनियों को वेनेजुएला में काम करने के लिए ऐसे विशेष लाइसेंस जारी कर चुका है। इसी आधार पर भारत को भी जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
भारत और ONGC को इस सौदे से क्या होगा फायदा?
लंबे समय से आर्थिक कुप्रबंधन और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण वेनेजुएला के इन दोनों तेल क्षेत्रों का उत्पादन काफी गिर चुका था। लेकिन ओएनजीसी के कमान संभालते ही दृश्य पूरी तरह बदल सकता है:
1. तेल उत्पादन में बंपर बढ़ोतरी
ओएनजीसी का मानना है कि ऑपरेशनल कंट्रोल हाथ में आते ही वह इन क्षेत्रों में नया निवेश करेगी।
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शुरुआती लक्ष्य: वर्तमान में 12,000 से 15,000 बैरल प्रति दिन (bpd) के स्तर से बढ़ाकर उत्पादन को एक साल के भीतर 30,000 बैरल प्रति दिन किया जाएगा।
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दीर्घकालिक लक्ष्य: आने वाले कुछ वर्षों में इस उत्पादन को 45,000 से 50,000 बैरल प्रति दिन तक पहुंचाने की योजना है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
2. $900 मिलियन (करीब ₹7,500 करोड़) के फंसे डिविडेंड की वसूली
सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक पहलू यह है कि वेनेजुएला की सरकारी कंपनी PDVSA पर ओएनजीसी का पिछले कई वर्षों से लगभग 900 मिलियन डॉलर (भारतीय मुद्रा में करीब 7,500 करोड़ रुपये से अधिक) का डिविडेंड (लाभांश) बकाया है। तेल उत्पादन बढ़ने और सीधे ऑपरेटर बनने से भारत इस फंसी हुई विशाल रकम को कच्चे तेल या राजस्व के रूप में वापस वसूलने में पूरी तरह सक्षम हो जाएगा।
संबंधित लिंक्स और संदर्भ (External References):
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