रविवार, अप्रैल 26 2026 | 12:20:21 AM
Breaking News
Home / अंतर्राष्ट्रीय / तेहरान का ‘सत्ता संघर्ष’: क्या गोपनीय पत्र बनेगा ईरान के लिए ‘ज़हर का प्याला’?

तेहरान का ‘सत्ता संघर्ष’: क्या गोपनीय पत्र बनेगा ईरान के लिए ‘ज़हर का प्याला’?

Follow us on:

तेहरान । शनिवार, 25 अप्रैल 2026

ईरान के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक ‘गोपनीय पत्र’ ने तूफान ला दिया है। जहाँ एक ओर डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरानी नेतृत्व आपस में “कुत्ते-बिल्लियों” की तरह लड़ रहा है, वहीं तेहरान सार्वजनिक रूप से एकजुटता दिखाने की पूरी कोशिश कर रहा है। लेकिन हकीकत की परतें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं।

विवाद की जड़: वह गोपनीय पत्र

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने सर्वोच्च नेता मोजतबा खमेनेई (जो अपने पिता अली खमेनेई की मृत्यु के बाद सत्ता के केंद्र में हैं) को एक अत्यंत गुप्त पत्र भेजा था। इस पत्र में चेतावनी दी गई है कि देश का आर्थिक संकट अब बर्दाश्त से बाहर हो चुका है।

  • मुख्य मांग: पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि शासन को बचाने के लिए अमेरिका के साथ परमाणु मुद्दे पर सीधी वार्ता करना अब विकल्प नहीं, बल्कि मजबूरी है।

  • हस्ताक्षरकर्ता: बताया जा रहा है कि इस पर राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान, विदेश मंत्री अब्बास अरागची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ जैसे दिग्गजों की सहमति थी।

फूट कैसे आई सामने?

विवाद तब गहराया जब यह निजी पत्र कट्टरपंथी हलकों में लीक हो गया। पूर्व परमाणु वार्ताकार अली बघेरी कनी का नाम इस लीक से जोड़ा जा रहा है, जिन्होंने कथित तौर पर इस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया और इसे अन्य कट्टरपंथियों को दिखा दिया। इसके बाद से ईरान की ‘मजलिस’ (संसद) और सुरक्षा घेरे में “समझौतावादी” बनाम “अडिग” गुटों के बीच जंग छिड़ गई है।

ट्रंप का ‘दावा’ और तेहरान का ‘जवाब’

डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान ने कि “ईरानी अधिकारी अंदरूनी कलह से जूझ रहे हैं,” तेहरान को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है। जवाब में, पेज़ेश्कियान और अरागची जैसे नेताओं ने सोशल मीडिया पर एक साथ संदेश जारी कर ‘एकता और सर्वोच्च नेता के प्रति वफादारी’ की कसम खाई। विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक दिखावा है ताकि पश्चिमी देशों को कमजोरी का संकेत न मिले।

क्या इतिहास खुद को दोहरा रहा है?

पर्यवेक्षक इस स्थिति की तुलना 1988 के उस दौर से कर रहे हैं जब अयातुल्ला खुमैनी ने ईरान-इराक युद्ध रोकने के लिए यूएन प्रस्ताव स्वीकार किया था। उन्होंने उसे “ज़हर का प्याला पीना” कहा था। आज मोजतबा खमेनेई के सामने भी वही स्थिति है—या तो वे अपनी विचारधारा से समझौता कर परमाणु वार्ता की मेज पर आएं, या फिर देश को पूर्ण आर्थिक पतन की ओर ले जाएं।

निष्कर्ष: आगे की राह

फिलहाल, पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रही वार्ताओं और ट्रंप के ‘मैक्सिमम प्रेशर’ के बीच ईरान एक चौराहे पर खड़ा है। सार्वजनिक रूप से वे भले ही “रेड लाइन्स” की बात कर रहे हों, लेकिन अंदरूनी तौर पर वे जानते हैं कि बिना किसी बड़े समझौते के 2026 का यह साल ईरान के लिए अस्तित्व का संकट बन सकता है।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का ‘अस्तित्व’ खतरे में: UN ने जबरन धर्मांतरण पर जारी की चेतावनी

इस्लामाबाद । गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों, विशेष रूप से हिंदू और …