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कमर्शियल एलपीजी आपूर्ति पर बड़ी राहत: सरकार ने हटाए सभी प्रतिबंध, थोक आपूर्ति भी 50% बहाल

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नई दिल्ली । गुरुवार, 25 जून 2026

भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (Ministry of Petroleum and Natural Gas) ने देश के औद्योगिक और वाणिज्यिक एलपीजी उपभोक्ताओं को एक बहुत बड़ी राहत दी है। सरकार ने गैर-घरेलू पैकेज्ड एलपीजी (Non-Domestic Packed LPG) की आपूर्ति पर लगे सभी क्षेत्रीय और सेक्टोरल प्रतिबंधों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। इस फैसले के बाद अब कमर्शियल एलपीजी सिलिंडरों की आपूर्ति पूरी तरह से उसी स्तर पर बहाल कर दी गई है, जो पश्चिम एशिया संकट (Strait of Hormuz व्यवधान) से पहले थी।

इसके साथ ही, संकट के शुरुआती दौर में पूरी तरह से निलंबित (Suspend) कर दी गई थोक एलपीजी (Bulk LPG) की आपूर्ति को भी 50 प्रतिशत तक बहाल करने की मंजूरी दे दी गई है। सरकार के इस कदम से देश के छोटे-बड़े उद्योगों, होटलों, रेस्तरां और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों की परिचालन लागत (Operational Cost) में भारी कमी आएगी।

पश्चिम एशिया संकट के दौरान क्या कदम उठाए गए थे? (पृष्ठभूमि)

हालिया पश्चिम एशिया संकट के दौरान वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई थी। उस समय देश के भीतर घरेलू रसोई गैस (Domestic LPG) की किल्लत को रोकने के लिए सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत कड़े और विशेष आदेश जारी किए थे।

उस आपातकालीन रणनीति के तहत:

  1. कमर्शियल पैकेज्ड और थोक एलपीजी की सप्लाई पर अस्थायी रोक लगा दी गई थी ताकि आम नागरिकों को घरों में इस्तेमाल होने वाली रसोई गैस निर्बाध मिलती रहे।

  2. स्वदेशी एलपीजी उत्पादन को बढ़ाने के लिए C3-C4 स्ट्रीम्स (प्रोपेन और ब्यूटेन धाराओं) को पेट्रोकेमिकल और अन्य अनुप्रवाह (Downstream) उद्योगों से मोड़कर (Divert) पूरी तरह एलपीजी उत्पादन के लिए अनिवार्य कर दिया गया था।

इस निर्णय से घरेलू उपभोक्ताओं को तो राहत मिली, लेकिन पेट्रोकेमिकल और थोक एलपीजी पर निर्भर उद्योगों को कच्चे माल की भारी कमी और परिचालन संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था।

अब क्या बदलाव किए गए हैं और उद्योगों को क्या लाभ होगा?

मंत्रालय के अनुसार, देश में स्वदेशी एलपीजी उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और साथ ही आयातित एलपीजी खेपों (Imported LPG Cargoes) की अनुमानित उपलब्धता भी काफी बढ़ गई है। इसे देखते हुए सरकार ने अपनी नीतियों में निम्नलिखित महत्वपूर्ण सुधार किए हैं:

1. पेट्रोकेमिकल उद्योगों के लिए C3-C4 स्ट्रीम का पुनः आवंटन

सरकार ने अब एलपीजी पूल में C3-C4 धाराओं के डायवर्जन को कम करने का निर्णय लिया है। अब गैर-एलपीजी उपयोगों के लिए C3-C4 स्ट्रीम का बढ़ा हुआ आवंटन लागू किया जाएगा। मंत्रालय के तहत आने वाले सेंटर ऑफ हाई टेक्नोलॉजी (CHT) को निर्देश दिया गया है कि वह पेट्रोकेमिकल और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए संस्थान-वार आवंटन तय करे और इसकी नियमित रिपोर्ट सौंपे। इससे पेट्रोकेमिकल सेक्टर की उत्पादन क्षमता में भारी सुधार होगा।

2. पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) पर क्रमिक ट्रांज़िशन

सरकार राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए क्लीनर फ्यूल को बढ़ावा दे रही है। जिन वाणिज्यिक और थोक उपभोक्ताओं ने पहले ही पीएनजी (PNG) अपना लिया है, वे पीएनजी पर ही बने रहेंगे। इसके अलावा, जिन उपभोक्ताओं के पास पीएनजी नेटवर्क की पहुंच है या जो शिफ्ट होने की प्रक्रिया में हैं, उन्हें सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) संस्थाओं के समन्वय से धीरे-धीरे पूरी तरह पीएनजी पर स्थानांतरित किया जाएगा।

घरेलू उपभोक्ताओं पर क्या असर होगा?

आम नागरिकों और घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के मन में इस फैसले को लेकर उठने वाली शंकाओं को मंत्रालय ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि:

  • घरेलू एलपीजी की उपलब्धता पर इस फैसले का कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

  • देश का कुल स्वदेशी एलपीजी उत्पादन प्रतिदिन 40 हजार मीट्रिक टन (40 TMT/Day) से कम नहीं होने दिया जाएगा।

  • तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को निर्देश दिया गया है कि वे घरेलू उपभोक्ताओं को नियमित और निर्बाध आपूर्ति को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाए रखें।

साथ ही, भविष्य में बेहतर योजना और आपूर्ति प्रबंधन के लिए ओएमसी (OMCs) को वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं का एक एकीकृत और व्यापक डेटाबेस बनाए रखने के लिए कहा गया है।

मुख्य बिंदु (Highlights):

  • औद्योगिक और वाणिज्यिक (Commercial) एलपीजी सिलिंडर पर लगे सभी क्षेत्रीय और क्षेत्रीय प्रतिबंध (sectoral restrictions) पूरी तरह समाप्त।

  • थोक एलपीजी (Bulk LPG) की आपूर्ति को प्री-क्राइसिस (संकट से पहले) के स्तर का 50 फीसदी तक बहाल किया गया।

  • पश्चिम एशिया संकट (West Asia Crisis) के दौरान लगाए गए आपातकालीन प्रतिबंधों को मंत्रालय ने वापस लिया।

  • पेट्रोकेमिकल उद्योगों के लिए C3-C4 स्ट्रीम का आवंटन दोबारा शुरू।

  • घरेलू रसोई गैस (Domestic LPG) उपभोक्ताओं की नियमित आपूर्ति रहेगी अप्रभावित; रोजाना 40,000 मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य।

निष्कर्ष

पेट्रोलियम मंत्रालय का यह संतुलित दृष्टिकोण देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक प्रगति दोनों को गति देने वाला है। जहाँ एक तरफ उद्योगों को कम लागत पर एलपीजी और पेट्रोकेमिकल इनपुट मिल सकेंगे, वहीं दूसरी तरफ आम जनता की रसोई गैस आपूर्ति भी पूरी तरह सुरक्षित रखी गई है।

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