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कनाडा ने माना 41 साल पुराना सच: एयर इंडिया फ्लाइट 182 ब्लास्ट के पीछे थे खालिस्तानी चरमपंथी, खुफिया एजेंसी का बड़ा कबूलनामा

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ओटावा । गुरुवार, 25 जून 2026

चार दशकों से अधिक समय से भारत जिस कड़वे सच को वैश्विक मंचों पर दोहराता आ रहा था, उसे आखिरकार कनाडा की धरती और वहां की खुफिया एजेंसी ने आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। 23 जून 1985 को हुए एयर इंडिया फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ बम विस्फोट को लेकर कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) ने पहली बार स्पष्ट शब्दों में माना है कि इस जघन्य आतंकी हमले को कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी चरमपंथियों ने अंजाम दिया था।

क्या हुआ था 23 जून 1985 को? (कनिष्क विमान हादसे का इतिहास)

23 जून 1985 को एयर इंडिया की फ्लाइट 182 (बोइंग 747-237B, जिसे ‘कनिष्क’ नाम दिया गया था) मॉन्ट्रियल-लंदन-नई दिल्ली-मुंबई मार्ग पर उड़ान भर रही थी। जब यह विमान आयरलैंड के हवाई क्षेत्र में अटलांटिक महासागर के ऊपर लगभग 9,400 मीटर (31,000 फीट) की ऊंचाई पर था, तभी इसके कार्गो होल्ड में रखे एक सूटकेस में भीषण बम विस्फोट हुआ।

इस विस्फोट के कारण विमान के हवा में ही टुकड़े हो गए और वह अटलांटिक महासागर में जा गिरा। इस हादसे में विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें 268 कनाडाई नागरिक (मुख्य रूप से भारतीय मूल के) और 24 भारतीय नागरिक शामिल थे। यह कनाडा के इतिहास का सबसे बड़ा और वैश्विक विमानन इतिहास के सबसे क्रूर आतंकवादी हमलों में से एक है।

Fact Check: कई शुरुआती रिपोर्टों में कनाडा द्वारा ‘पहली बार सच कबूलने’ का दावा 41 साल बाद का किया गया है, हालांकि कनाडाई जांच एजेंसियों (RCMP) और पूर्व की न्यायिक जांच समितियों (जैसे जस्टिस जॉन मेजर की रिपोर्ट) ने अपनी कानूनी जांच में इस बात को पहले भी माना था, लेकिन हाल ही में CSIS द्वारा सार्वजनिक मंचों (जैसे फेसबुक पोस्ट) पर सीधे और बिना किसी हिचकिचाहट के ‘खालिस्तानी चरमपंथियों’ का नाम लेकर इस सच को स्वीकारना एक बड़ा नीतिगत और राजनीतिक बदलाव दिखाता है।

कनाडाई खुफिया एजेंसी CSIS ने सोशल मीडिया पर क्या लिखा?

राष्ट्रीय आतंकवाद पीड़ित स्मरण दिवस (National Day of Remembrance for Victims of Terrorism) के अवसर पर कनाडाई सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (CSIS) ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा:

“23 जून, 1985 को कनाडा स्थित खालिस्तानी चरमपंथियों की ओर से लगाए गए बम से उस विमान में ब्लास्ट हुआ, जिसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में अधिकांश कनाडाई थे। यह कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला है और हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा कम्युनिटी के लिए एक अहम मोड़ साबित हुआ। पिछले चार दशकों से हम कनाडाई लोगों को राजनीतिक, धार्मिक और विचारधारा से प्रेरित हिंसा से बचाने के लिए प्रतिबद्ध रहे हैं।”

विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा की राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी द्वारा ‘खालिस्तानी आतंकवादियों’ शब्द का खुलकर उपयोग करना भारत के उस रुख को सही साबित करता है, जिसमें भारत लगातार कनाडा पर अपनी धरती से संचालित होने वाले भारत-विरोधी तत्वों पर ढुलमुल रवैया अपनाने का आरोप लगाता रहा है।

भारत की प्रतिक्रिया और आतंकवाद से लड़ने का संकल्प

इस घटना की 41वीं बरसी पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कनिष्क बम विस्फोट में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने संदेश में दोहराया कि भारत हर प्रकार के आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद से निपटने के अपने संकल्प पर अडिग है।

भारत लगातार वैश्विक मंचों पर यह कहता आया है कि आतंकवाद को किसी भी राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए और ‘कनिष्क’ त्रासदी इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि आतंकवाद किसी भी देश के लिए कितना आत्मघाती साबित हो सकता है।

कनाडा के नए राजनीतिक नेतृत्व (मार्क कार्नी) का बदला हुआ रुख

कनाडा के वर्तमान प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस बरसी पर कड़ा रुख अपनाते हुए इस बम विस्फोट को “कनाडा के इतिहास में हुआ सबसे भीषण हमला” करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कनाडा का नया प्रशासन हर तरह के हिंसक चरमपंथ के खिलाफ मजबूती से खड़ा है और देश की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

कनाडा में हुए हालिया राजनीतिक बदलावों के बाद, भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने की कोशिशें तेज हुई हैं। पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल (विशेषकर 2023 में हरदीप सिंह निज्जर मामले के बाद) के दौरान दोनों देशों के रिश्ते बेहद निचले स्तर पर पहुंच गए थे। हालांकि, नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में कनाडा अब उग्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ अधिक सख्त और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपना रहा है।

कनिष्क विस्फोट से जुड़े मुख्य बिंदु और आंकड़े

विवरण महत्वपूर्ण तथ्य
हादसे की तारीख 23 जून 1985
विमान का नाम एयर इंडिया फ्लाइट 182 (कनिष्क)
कुल मौतें 329 (268 कनाडाई, 24 भारतीय नागरिक)
दोषी संगठन कनाडा स्थित खालिस्तानी चरमपंथी
जांच का निष्कर्ष 1984 के ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ के प्रतिशोध में आतंकियों ने रचा था षड्यंत्र

निष्कर्ष

एयर इंडिया फ्लाइट 182 कनिष्क विस्फोट के 41 वर्षों के इतिहास में कनाडा की सुरक्षा एजेंसी द्वारा इस सच को सार्वजनिक रूप से खुले तौर पर स्वीकार करना भारत की कूटनीतिक जीत और ऐतिहासिक सत्य की पुष्टि है। आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में यह बेहद जरूरी है कि सुरक्षित पनाहगाहों और विचारधारा से प्रेरित हिंसा को जड़ से खत्म किया जाए ताकि ‘कनिष्क’ जैसी मानवीय त्रासदियों की पुनरावृत्ति दोबारा कभी न हो।

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