भुवनेश्वर । मंगलवार, 26 मई 2026
ओडिशा की सियासत में इन दिनों चुनावी नतीजों के बाद की हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार को जब पूर्व राज्यसभा सांसद देबाशीष सामंतराय ने बीजू जनता दल (BJD) की प्राथमिक सदस्यता और संसद से इस्तीफा दिया, तो कयासों का बाजार गर्म था। लेकिन महज 24 घंटे के भीतर, मंगलवार को उन्होंने नई दिल्ली में भारतीय पाना पार्टी (भाजपा) का पटका पहनकर सभी चर्चाओं पर विराम लगा दिया। इसे नवीन पटनायक की अगुवाई वाली बीजेडी के लिए एक बहुत बड़ा सांगठनिक और राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
दिल्ली में हुआ ‘कमल’ का स्वागत
मंगलवार को देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान देबाशीष सामंतराय ने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ली। इस मौके पर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह, ओडिशा के पार्टी प्रभारी विजय पाल सिंह तोमर, प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता अनिल बलूनी मौजूद रहे। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने सामंतराय का पार्टी में स्वागत करते हुए कहा कि उनके आने से ओडिशा में भाजपा की जमीन और मजबूत होगी।
नवीन बाबू पर ‘सुनियोजित अपमान’ का गंभीर आरोप
देबाशीष सामंतराय लंबे समय से पार्टी के आंतरिक समीकरणों और शीर्ष नेतृत्व की कार्यशैली से असंतुष्ट चल रहे थे। बीजेडी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को भेजे अपने भावुक और तीखे त्यागपत्र में सामंतराय ने लिखा कि उन्होंने हमेशा पूरी निष्ठा के साथ दल की सेवा की, लेकिन बीते कुछ समय से उन्हें “सुनियोजित तरीके से उपेक्षित और अपमानित” महसूस कराया जा रहा था। उन्होंने कहा कि जनता के हितों की रक्षा के लिए उनके पास पार्टी छोड़ने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था।
जमीनी स्तर के नेता का जाना बीजेडी को क्यों खलेगा?
सामंतराय ओडिशा की राजनीति के कोई नए खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि वे एक कद्दावर जमीनी नेता (Mass Leader) माने जाते हैं:
-
तीन बार के विधायक: उन्होंने तिरथोल और बाराबाटी-कटक जैसे बेहद महत्वपूर्ण और राजनीतिक रूप से संवेदनशील विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया है।
-
सांस्कृतिक और सामाजिक योगदान: वे ओडिशा पर्यटन विकास निगम (OTDC) के अध्यक्ष के रूप में काम कर चुके हैं। इसके अलावा लोक कला, संस्कृति के संरक्षण और गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में उनके काम को काफी सराहा जाता रहा है।
राज्यसभा में कमजोर हुई बीजेडी
सोमवार सुबह सामंतराय ने नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन से मिलकर अपना इस्तीफा सौंपा था। इस इस्तीफे के मंजूर होने के बाद देश के उच्च सदन यानी राज्यसभा में बीजेडी का गणित पूरी तरह बिगड़ गया है। अब राज्यसभा में बीजेडी के सांसदों की संख्या घटकर केवल 5 रह गई है, जो कभी संसद में एक मजबूत क्षेत्रीय ताकत हुआ करती थी।
विश्लेषकों की नजर: 2024 की हार के बाद बिखरता कुनबा?
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि वर्ष 2024 के ओडिशा विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से बीजू जनता दल के भीतर का आंतरिक असंतोष अब खुलकर सड़कों और मंचों पर आने लगा है। पुराने और वफादार नेताओं का इस तरह पार्टी आलाकमान की कार्यशैली पर सवाल उठाकर जाना यह दर्शाता है कि नवीन पटनायक के ‘किले’ के भीतर अंदरूनी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
Matribhumisamachar


