नई दिल्ली. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। शुक्रवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों को लागू करने की मांग को लेकर छात्रसंघ (JNUSU) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया। स्थिति तब बिगड़ गई जब छात्रों ने कैंपस से शिक्षा मंत्रालय तक मार्च निकालने की कोशिश की, जिसे रोकने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।
बैरिकेडिंग और पुलिस के साथ भिड़ंत
छात्रों के मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुबह से ही विश्वविद्यालय के मुख्य द्वारों पर भारी घेराबंदी कर दी थी। जैसे ही हजारों की संख्या में छात्र प्रदर्शन करते हुए गेट पर पहुँचे, उन्होंने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को हटाने का प्रयास किया। इस दौरान छात्रों और सुरक्षाबलों के बीच सीधी झड़प हुई, जिसमें कुछ पुलिस कर्मियों के घायल होने की खबर है।
छात्र नेता हिरासत में
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए छात्रसंघ के शीर्ष पदाधिकारियों समेत लगभग 40 से 50 छात्रों को हिरासत में ले लिया है। हिरासत में लिए गए प्रमुख नामों में शामिल हैं:
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अदिति मिश्रा (अध्यक्ष)
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गोपिका के बाबू (उपाध्यक्ष)
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सुनील यादव (महासचिव)
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दानिश अली (संयुक्त सचिव)
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नितिश कुमार (पूर्व अध्यक्ष)
प्रमुख माँगें और आरोप
प्रदर्शनकारी छात्र हाथों में पोस्टर लिए ‘रोहित एक्ट लागू करो’, ‘जातिवादी वीसी को बर्खास्त करो’ और ‘यूजीसी एक्ट लागू करो’ जैसे नारे लगा रहे थे। छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
“हम शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर मार्च कर रहे थे, लेकिन सादे कपड़ों में मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने छात्रों के साथ बदसलूकी की और हमें घसीटकर हिरासत में लिया गया।”
वर्तमान स्थिति
फिलहाल कैंपस के आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन स्थल पर करीब 2000 से 3000 छात्र मौजूद थे। विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस स्थिति पर निरंतर नजर बनाए हुए हैं, ताकि हिंसा को दोबारा भड़कने से रोका जा सके।
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