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अयोध्या में चमत्कार: 9 मिनट तक रामलला के मस्तक पर विराजे ‘सूर्यदेव’, देखें तीसरी मंजिल से कैसे पहुंची किरणें

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अयोध्या। 27 मार्च, 2026

रामनवमी के पावन पर्व पर आज चैत्र शुक्ल नवमी को धर्मनगरी अयोध्या एक बार फिर ऐतिहासिक और आध्यात्मिक गौरव की साक्षी बनी। दोपहर ठीक 12:00 बजे, अभिजीत मुहूर्त में प्रभु श्री रामलला का तीसरा भव्य सूर्य तिलक संपन्न हुआ। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह तीसरा अवसर था जब ‘सूर्यवंश’ के कुलदेवता भगवान भास्कर ने स्वयं अपने वंशज का तिलक किया।

9 मिनट तक रहा दिव्य प्रकाश का संगम

इस वर्ष का सूर्य तिलक पिछले वर्षों की तुलना में अधिक उन्नत रहा। दोपहर 12 बजे जैसे ही भगवान का प्राकट्य हुआ, सूर्य की किरणें सीधे गर्भगृह में विराजित रामलला के मस्तक पर 58 मिमी के गोल तिलक के रूप में चमकीं। यह अलौकिक दृश्य करीब 9 मिनट तक बना रहा, जिसे देख मंदिर परिसर ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।

अत्याधुनिक तकनीक: तीसरी मंजिल से पहुंचीं किरणें

CBRI (रुड़की) और IIA (बेंगलुरु) के वैज्ञानिकों ने इस बार मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थापित स्थायी ऑप्टो-मैकेनिकल सिस्टम का उपयोग किया।

  • सिस्टम: इसमें अष्टधातु के पाइपों के भीतर 4 उच्च गुणवत्ता वाले दर्पण (Mirrors) और 4 लेंस का उपयोग किया गया है।

  • सटीकता: सूर्य की किरणों को ऊपरी तल से परावर्तित (Reflect) कर सीधे गर्भगृह तक पहुँचाया गया।

  • 19 साल का चक्र: वैज्ञानिकों ने इस सिस्टम को 19 वर्षों के चंद्र कैलेंडर के अनुसार डिजाइन किया है, ताकि हर साल रामनवमी पर ठीक 12 बजे यह तिलक संभव हो सके।

10 लाख से अधिक भक्तों का सैलाब और विशेष व्यवस्था

राम जन्मोत्सव के इस महापर्व पर अयोध्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। प्रशासन के अनुसार, करीब 10 से 12 लाख भक्तों ने राम पथ और भक्ति पथ पर कतारबद्ध होकर दर्शन किए।

दर्शन के समय में बदलाव:

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दर्शन की अवधि बढ़ा दी है:

  • नया समय: सुबह 5:00 बजे से रात 11:00 बजे तक (लगातार 18 घंटे)।

  • विशेष भोग: सूर्य तिलक के पश्चात भगवान को 56 प्रकार के व्यंजनों का महाभोग लगाया गया।

प्रधानमंत्री ने दी बधाई, तकनीक की सराहना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर देशवासियों को रामनवमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस दिव्य दृश्य को साझा करते हुए इसे “विकसित भारत की आध्यात्मिक शक्ति और वैज्ञानिक प्रगति का संगम” बताया। पिछले वर्षों की तरह, इस बार भी प्रधानमंत्री ने डिजिटल माध्यम से इस क्षण का अवलोकन किया।

मुख्य आकर्षण एक नज़र में:

  • अवधि: 9 मिनट का सूर्य तिलक (दोपहर 12:00 से 12:09 तक)।

  • तकनीक: अष्टधातु पाइप, 4 दर्पण और 4 लेंस वाला अत्याधुनिक गियर सिस्टम।

  • श्रद्धालु: 10 लाख से अधिक लोगों का आगमन।

  • प्रसारण: देशभर में 100 से अधिक LED स्क्रीनों और दूरदर्शन पर सीधा प्रसारण।

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