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ईरान-इजरायल युद्ध के बीच बड़ी राहत: मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर ₹10 घटाया टैक्स, डीजल अब ‘टैक्स फ्री’

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नई दिल्ली | शुक्रवार, 27 मार्च 2026

पश्चिम एशिया (ईरान-इजरायल-अमेरिका) में जारी युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित होने के खतरों के बीच, केंद्र सरकार ने आम जनता और तेल कंपनियों को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में ₹10 प्रति लीटर की कटौती का ऐतिहासिक ऐलान किया है।

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल पर अब केवल ₹3 प्रति लीटर टैक्स लगेगा, जबकि डीजल को टैक्स मुक्त कर दिया गया है। यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया कि पिछले एक महीने में कच्चा तेल $70 से उछलकर $122 प्रति बैरल तक पहुंच गया था। दुनिया भर में तेल की कीमतें 30% से 50% तक बढ़ी हैं। सरकार के पास दो रास्ते थे: या तो कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर जनता पर बोझ डालें, या खुद के राजस्व का बलिदान देकर जनता को सुरक्षा कवच दें।

सरकार ने दूसरा रास्ता चुना है। इसके साथ ही, देश में ईंधन की कमी न हो, इसके लिए डीजल के निर्यात पर ₹21.5 और एटीएफ (हवाई ईंधन) पर ₹29.5 प्रति लीटर का विंडफॉल टैक्स भी लगा दिया गया है।

क्या पंप पर घटेंगे दाम?

हालांकि सरकार ने टैक्स घटाया है, लेकिन विशेषज्ञों और आधिकारिक सूत्रों का मानना है कि पेट्रोल पंप पर कीमतों में तत्काल कमी की संभावना बेहद कम है। इसके पीछे तीन बड़े कारण हैं:

  1. कंपनियों का भारी घाटा: अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल के कारण भारतीय तेल कंपनियां (IOC, BPCL, HPCL) पेट्रोल पर ₹24 और डीजल पर ₹30 प्रति लीटर का नुकसान उठा रही थीं।

  2. घाटे की भरपाई: सरकार द्वारा दी गई ₹10 की राहत का उपयोग कंपनियां अपने इसी घाटे (Under-recoveries) को कम करने के लिए करेंगी।

  3. निजी कंपनियों का दबाव: हाल ही में नायरा एनर्जी जैसी निजी कंपनियों ने कीमतों में ₹3 से ₹5 तक की बढ़ोतरी की थी, जो बाजार में बढ़ते दबाव को दर्शाता है।

विश्लेषण: ईरान-इजरायल संघर्ष: क्या दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही है?

वैश्विक बाजार की हलचल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले को 10 दिनों (6 अप्रैल तक) के लिए टालने का संकेत दिया है, जिससे बाजार में कुछ स्थिरता आई है। ब्रेंट क्रूड वर्तमान में $107 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। ट्रंप के सकारात्मक रुख से उम्मीद जगी है कि यदि तनाव कम होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें $90 के नीचे आ सकती हैं।

निष्कर्ष

सरकार का यह कदम महंगाई को ‘फ्रीज’ करने की एक कोशिश है। भले ही दाम कम न हों, लेकिन इस कटौती ने भविष्य में होने वाली ₹10-15 की संभावित बढ़ोतरी को रोक दिया है। आम आदमी के लिए राहत तभी मिलेगी जब वैश्विक बाजार में कच्चा तेल $85 प्रति बैरल के नीचे स्थिर होगा।

मुख्य आकर्षण:

  • पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹13 से घटकर ₹3 प्रति लीटर हुई।

  • डीजल पर टैक्स पूरी तरह खत्म, अब शून्य (0) एक्साइज ड्यूटी।

  • ईंधन के निर्यात पर लगा भारी टैक्स, घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश।

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल $122 के स्तर को छूने के बाद $107 पर आया।

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