नई दिल्ली | 27 मार्च 2026
भारतीय रक्षा क्षेत्र में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की उच्च स्तरीय बैठक में करीब ₹2.38 लाख करोड़ (लगभग $25 अरब) के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को ‘Acceptance of Necessity’ (AoN) प्रदान की गई है। यह कदम न केवल भारतीय सेनाओं की मारक क्षमता को दोगुना करेगा, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा निर्माण को अब तक का सबसे बड़ा बूस्ट देगा।
1. वायुसेना की ताकत: S-400 की 5 नई स्क्वाड्रन और ‘सुदर्शन’ का सुरक्षा चक्र
इस सौदे का सबसे बड़ा आकर्षण रूस के साथ 5 अतिरिक्त S-400 ‘सुदर्शन’ मिसाइल सिस्टम की खरीद को मंजूरी देना है।
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रणनीतिक महत्व: पहले से मौजूद 5 प्रणालियों के बाद, इन नई यूनिट्स के आने से भारत के पास कुल 10 S-400 स्क्वाड्रन हो जाएंगे। इसे पूर्वी (चीन) और पश्चिमी (पाकिस्तान) दोनों सीमाओं पर तैनात किया जाएगा।
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मारक क्षमता: यह सिस्टम 400 किमी की दूरी से ही दुश्मन के विमानों, बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन्स को नष्ट करने में सक्षम है।
2. 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) की खरीद
भारतीय वायुसेना के पुराने हो चुके An-32 बेड़े को बदलने के लिए 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) के प्रस्ताव को हरी झंडी मिल गई है।
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मेक इन इंडिया: इनमें से 12 विमान ‘Fly-away’ स्थिति में आएंगे, जबकि शेष 48 विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इसमें एयरबस, लॉकहीड मार्टिन और एम्ब्रेयर जैसी कंपनियां प्रमुख दावेदार हैं।
3. ‘सुपर सुखोई’ की राह: Su-30MKI इंजन ओवरहाल
वायुसेना के सबसे घातक लड़ाकू विमान Sukhoi Su-30MKI के इंजनों (AL-31FP) के बड़े पैमाने पर ओवरहाल और मरम्मत के लिए ₹26,000 करोड़ से अधिक का प्रावधान किया गया है। यह काम हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा किया जाएगा, जिससे इन विमानों की ऑपरेशनल लाइफ अगले 15-20 वर्षों के लिए बढ़ जाएगी।
4. थल सेना के लिए ‘धनुष’ का प्रहार
आर्टिलरी रेजिमेंट को मजबूत करने के लिए 300 अतिरिक्त ‘धनुष’ (Dhanush) होवित्जर गन की खरीद को मंजूरी दी गई है।
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असर: इससे सेना में 15 नई आर्टिलरी रेजिमेंट खड़ी की जा सकेंगी। 155mm/45-कैलिबर वाली यह स्वदेशी गन बोफोर्स का आधुनिक और अधिक घातक संस्करण है।
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एयर डिफेंस: इसके साथ ही सेना के लिए ‘एयर डिफेंस ट्रैक्ड सिस्टम’ और ‘ब्रह्मोस’ की नई रेजिमेंट (800 किमी रेंज वाली) के प्रस्तावों को भी आगे बढ़ाया गया है।
क्यों खास है यह मेगा डील? (मुख्य बिंदु)
| विशेषता | विवरण |
| कुल लागत | ₹2.38 लाख करोड़ (2026 की सबसे बड़ी डील) |
| मुख्य फोकस | लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस और लॉजिस्टिक्स क्षमता |
| स्वदेशी तकनीक | 65% से अधिक उपकरण भारत में निर्मित होंगे |
| सुरक्षा लक्ष्य | टू-फ्रंट वॉर (Two-front war) की तैयारियों को मजबूती |
निष्कर्ष: बदलता रक्षा परिदृश्य
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन प्रस्तावों में से अधिकांश ‘Buy Indian-IDDM’ (Indigenously Designed, Developed and Manufactured) श्रेणी के तहत हैं। यह न केवल भारतीय सीमाओं को सुरक्षित करेगा, बल्कि वैश्विक रक्षा निर्यात बाजार में भी भारत की धाक जमाएगा। आने वाले 5-8 वर्षों में इन हथियारों की आपूर्ति पूरी होने की उम्मीद है।
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