चंडीगढ़ | शुक्रवार, 27 मार्च, 2026
पंजाब की खडूर साहिब लोकसभा सीट से निर्दलीय सांसद और ‘वारिस पंजाब दे’ के प्रमुख अमृतपाल सिंह को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से तगड़ा झटका लगा है। अदालत ने वर्तमान संसद सत्र (बजट सत्र 2026) में भाग लेने के लिए अस्थायी रिहाई या पैरोल की मांग करने वाली उनकी याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और राज्य की कानून-व्यवस्था सर्वोपरि है।
सदस्यता पर मंडराया ’60 दिनों’ का संकट
अदालत में सुनवाई के दौरान यह अहम जानकारी सामने आई कि अमृतपाल सिंह पिछले 59 दिनों से संसद की कार्यवाही से अनुपस्थित हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 101(4) के तहत, यदि कोई सांसद सदन की अनुमति के बिना लगातार 60 दिनों तक अनुपस्थित रहता है, तो सदन उसकी सीट को रिक्त घोषित कर सकता है।
अमृतपाल सिंह के वकीलों ने तर्क दिया कि एक निर्वाचित प्रतिनिधि होने के नाते 19 लाख मतदाताओं की आवाज उठाना उनका संवैधानिक अधिकार है। हालांकि, केंद्र और राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट किया कि हिरासत में होने के बावजूद उन्हें सदन की ‘अनुपस्थिति समिति’ (Committee on Absence of Members) को पत्र लिखकर छुट्टी की मांग करनी चाहिए थी, जो उन्होंने अब तक नहीं किया था।
सुरक्षा एजेंसियों का कड़ा रुख
पंजाब सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने पैरोल का पुरजोर विरोध करते हुए अदालत को बताया कि:
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कानून-व्यवस्था: अमृतपाल की रिहाई से राज्य में अस्थिरता पैदा हो सकती है।
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NSA की गंभीरता: वह राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं, जो सामान्य अपराधों से अलग श्रेणी में आता है।
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वर्चुअल मोड का अभाव: अदालत को यह भी सूचित किया गया कि लोकसभा के नियमों में किसी सांसद को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यवाही में भाग लेने का कोई प्रावधान नहीं है।
क्या है आगे का रास्ता?
अदालत के इस फैसले के बाद अब अमृतपाल सिंह मौजूदा बजट सत्र (जो 2 अप्रैल 2026 तक प्रस्तावित है) में शामिल नहीं हो सकेंगे। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अब उनके पास केवल सुप्रीम कोर्ट का रुख करने या लोकसभा अध्यक्ष को अपनी अनुपस्थिति को माफ करने (Condonation of absence) के लिए औपचारिक आवेदन देने का ही विकल्प बचा है, ताकि उनकी सदस्यता सुरक्षित रह सके।
विशेष टिप्पणी: अमृतपाल सिंह को जून 2024 में चुनाव जीतने के बाद केवल एक बार (5 जुलाई 2024) शपथ ग्रहण के लिए पैरोल दी गई थी। तब से वह लगातार जेल में ही हैं।
मुख्य बिंदु:
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बजट सत्र में शामिल होने की याचिका को किया खारिज।
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संसद से लगातार 60 दिनों की अनुपस्थिति के कारण सदस्यता रद्द होने का खतरा बढ़ा।
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कोर्ट ने माना— ‘राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था’ व्यक्तिगत अधिकारों से ऊपर।
Matribhumisamachar


