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डोडा पोस्टर विवाद: क्या यह शांति भंग करने की कोई गहरी साजिश है?

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

जम्मू । बुधवार, 29 अप्रैल 2026

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में उस समय हड़कंप मच गया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में एक अज्ञात व्यक्ति को निर्माणाधीन नेपली फ्लाईओवर (गणपत ब्रिज के पास) पर पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिफ मुनीर के समर्थन वाले पोस्टर चिपकाते हुए देखा गया। इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन की नींद उड़ा दी है, बल्कि क्षेत्र में सुरक्षा और शांति को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना का घटनाक्रम और वायरल वीडियो की सच्चाई

वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति अंधेरे या एकांत का फायदा उठाकर पोस्टर लगा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस वीडियो में जियोटैगिंग (Geotagging) सक्रिय थी, जो यह दर्शाती है कि इसे जानबूझकर एक डिजिटल पदचिह्न (digital footprint) छोड़ने के लिए बनाया गया था ताकि यह अधिक प्रामाणिक लगे।

पुलिस के अनुसार, पोस्टर में पाकिस्तानी झंडे के साथ ‘जम्मू कश्मीर यूथ मूवमेंट’ नामक संगठन का नाम लिखा है। पोस्टर पर उर्दू में कुछ आपत्तिजनक नारे और पाकिस्तानी नेतृत्व की प्रशंसा की गई है।

पुलिस की कार्रवाई और तकनीकी जांच

डोडा पुलिस ने इस मामले में त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए FIR दर्ज कर ली है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे वर्तमान में दो मुख्य पहलुओं पर काम कर रहे हैं:

  1. वीडियो की सत्यता: क्या यह वीडियो वास्तविक है या इसे ‘AI’ और ‘डीपफेक’ तकनीक के माध्यम से क्षेत्र में तनाव पैदा करने के लिए कृत्रिम रूप से तैयार किया गया है?

  2. आरोपियों की पहचान: सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी निगरानी (Technical Surveillance) के जरिए पोस्टर लगाने वाले और वीडियो शूट करने वाले व्यक्ति की तलाश की जा रही है।

क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

घटना के बाद डोडा और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री साझा करने से बचें। सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि यह सीमा पार से संचालित किसी ‘प्रोपेगेंडा सेल’ का काम हो सकता है जिसका उद्देश्य स्थानीय युवाओं को गुमराह करना है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।