लखनऊ । शनिवार, 16 मई 2026
उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ पुलिस और क्रिमिनल इंटेलिजेंस विंग (CIW) की संयुक्त टीम ने अंतरराज्यीय गिरोहों के खिलाफ एक बेहद महत्वपूर्ण कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने तकनीकी निगरानी और सटीक इनपुट के आधार पर जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में दबिश देकर दो बेहद शातिर और इनामी बदमाशों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) का एक निलंबित छात्र भी शामिल है। दोनों आरोपियों पर पुलिस ने 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। पुलिस दोनों को जम्मू-कश्मीर से ट्रांजिट रिमांड पर लेकर अलीगढ़ आई, जहाँ शनिवार को उन्हें स्थानीय अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
6 मई को खंडहर किले में छापेमारी के बाद खुला था राज
मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए एसपी सिटी आदित्य बंसल ने बताया कि यह पूरी कार्रवाई 6 मई की रात को पंजीपुर रोड स्थित एक खंडहर पड़े किले में हुई छापेमारी की कड़ी का हिस्सा है। उस दौरान थाना सिविल लाइन, थाना क्वार्सी और क्रिमिनल इंटेलिजेंस विंग की संयुक्त टीम ने डकैती की योजना बना रहे और अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त में शामिल 8 शातिर बदमाशों को मौके से दबोचा था।
बरामदगी का विवरण: पुलिस को मौके से 6 अवैध पिस्टल, 4 देसी तमंचे और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस मिले थे। इसी मामले में थाना सिविल लाइन में विभिन्न संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर गिरोह के नेटवर्क की जांच शुरू की गई थी।
जांच में सामने आए एएमयू छात्र और उसके साथी के नाम
गिरफ्तार बदमाशों से हुई पूछताछ और तकनीकी जांच के बाद पुलिस को इस गिरोह से जुड़े दो और मुख्य चेहरों का पता चला। इनकी पहचान एएमयू में एमसीए (MCA) के छात्र यासिर कश्मीरी और उसके अलीगढ़ निवासी साथी शाहबाज के रूप में हुई। वारदात के बाद से ही दोनों आरोपी फरार चल रहे थे, जिसकी वजह से पुलिस ने चार दिन पहले ही इन दोनों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया था।
आरोपियों की पहचान और लंबा आपराधिक इतिहास
पुलिस के अनुसार, पकड़े गए दोनों आरोपियों का पुराना और बेहद खतरनाक आपराधिक रिकॉर्ड रहा है:
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यासिर कश्मीरी: पुत्र अहमद नजीर, निवासी दक्षिण गांव, थाना सिरसी, जिला किश्तवाड़ (जम्मू-कश्मीर)। वर्तमान में वह पटवारी नगला मोहन (थाना क्वार्सी, अलीगढ़) में रह रहा था। यासिर पर पहले से ही एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act), हत्या का प्रयास, आर्म्स एक्ट और अन्य संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उसकी आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए उसे पहले ही निलंबित कर दिया था। पूर्व में उसके हॉस्टल के कमरे से पिस्तौल और नकली नोट भी बरामद हो चुके हैं।
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शाहबाज: पुत्र छोटे खां, निवासी मंजूरगढ़ी, थाना क्वार्सी (अलीगढ़)। शाहबाज पर भी अपहरण, अवैध फायरिंग, जानलेवा हमला (मारपीट) और आर्म्स एक्ट के तहत कई संगीन मामले दर्ज हैं।
संभावित सुधार और नेटवर्क की गहन जांच
इस बड़ी गिरफ्तारी के बाद पुलिस इस भ्रम को पूरी तरह दूर कर चुकी है कि यह केवल स्थानीय स्तर का गिरोह था। एसपी सिटी ने स्पष्ट किया है कि गिरोह के तार देश के कई अन्य राज्यों तक फैले होने की आशंका है। पुलिस की एक विशेष टीम अब इस बात की कड़ाई से जांच कर रही है कि जम्मू-कश्मीर से लेकर उत्तर प्रदेश तक फैले इस नेटवर्क में अवैध हथियारों की सप्लाई कहां-कहां की जा रही थी और इनका मुख्य खरीदार कौन था। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े कुछ और सफेदपोशों और बदमाशों के चेहरों से नकाब हटाया जाएगा।
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