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यादगीर में RSS पथ संचलन में शामिल दो सरकारी शिक्षक सस्पेंड: जानिए कर्नाटक सिविल सेवा नियम, शिक्षकों की दलील और राजनीतिक घमासान

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कर्नाटक के यादगीर में RSS पथ संचलन के दौरान पंक्तिबद्ध मार्च करते स्वयंसेवक और निलंबन नोटिस की फाइल तस्वीर।
यादगीर | शनिवार, 29 अगस्त 2026
कर्नाटक के यादगीर (Yadgir) जिले में दो सरकारी स्कूल शिक्षकों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के ‘पथ संचलन’ (Route March) कार्यक्रम में हिस्सा लेने के आरोप में शिक्षा विभाग द्वारा निलंबित कर दिया गया है। उप-निदेशक स्कूल शिक्षा (DDPI) चन्नाबसप्पा मुधोल द्वारा जारी निलंबन आदेशों के अनुसार, दोनों शिक्षकों के खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Enquiry) लंबित रखी गई है।
इस कार्रवाई के बाद से राज्य में सरकारी कर्मचारियों के आचरण, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संघ की गतिविधियों में उनकी भागीदारी को लेकर एक नया कानूनी और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

निलंबन का पूरा घटनाक्रम और शिक्षकों की पहचान

निलंबित किए गए शिक्षकों की पहचान इस प्रकार हुई है:
  1. गुरुराज जोशी: हुंसगी के सरकारी कन्या उच्च विद्यालय (Government Girls High School, Hunasagi) में सहायक शिक्षक।
  2. अन्ना साहेब देशमुख: सुरपुर तालुक स्थित कुप्पी गांव के सरकारी प्राथमिक विद्यालय (Government Lower Primary School, Kuppi) में प्रधान शिक्षक।
शिक्षा विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक, दोनों शिक्षकों ने अक्टूबर 2025 के दौरान क्रमशः तालीकोटी और हुंसगी में आयोजित आरएसएस के पथ संचलन में भाग लिया था। एक स्थानीय समाचार पत्र में तस्वीर प्रकाशित होने और ‘अम्बेडकर स्वाभिमानी सेना’ के जिला अध्यक्ष जुम्मन्ना गुड़ीमानी द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद विभाग ने संज्ञान लिया।

कर्नाटक सिविल सेवा (आचरण) नियम, 2021 का उल्लंघन

शिक्षा विभाग ने अपने निलंबन आदेश में स्पष्ट किया है कि शिक्षकों की संघ के पथ संचलन में उपस्थिति कर्नाटक सिविल सेवा (आचरण) नियम, 2021 के नियम 3(1), 3(2), 3(3), 5(1) और 7 का प्रथम दृष्टया उल्लंघन है।
  • नियमों की अवहेलना: विभाग के अनुसार, सरकारी सेवकों को ऐसे संगठनों या रैलियों से दूर रहना चाहिए जिन्हें राजनीतिक या वैचारिक माना जाता है।
  • कर्तव्य में लापरवाही: सरकारी पद पर रहते हुए ऐसे आयोजनों में दिखना कर्तव्यहीनता और अनुशासनहीनता के दायरे में आता है।

शिक्षकों की सफाई और विभाग का फैसला

कार्रवाई से पहले शिक्षा विभाग ने दोनों शिक्षकों को कारण बताओ (Show-Cause) नोटिस जारी किया था। शिक्षकों ने अपने लिखित जवाब में दो मुख्य तर्क दिए थे:
  1. गैर-कार्यकारी समय: यह आयोजन स्कूल के कामकाजी घंटों और शैक्षणिक समय (Duty Hours) के बाहर आयोजित किया गया था।
  2. सांस्कृतिक दृष्टिकोण: उन्होंने इस पथ संचलन को किसी राजनीतिक दल का मंच मानने के बजाय एक विशुद्ध सांस्कृतिक एवं सामाजिक आयोजन के रूप में देखा।
हालांकि, शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के इस स्पष्टीकरण को खारिज करते हुए कहा कि सेवा नियमों के तहत यह तर्क स्वीकार्य नहीं है और दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

राजनीतिक बयानबाजी और विरोध

शिक्षकों पर हुई इस कार्रवाई के बाद कर्नाटक की राजनीति में सरगर्मी बढ़ गई है:
  • विपक्ष (भाजपा व अन्य दल): विपक्षी नेताओं का तर्क है कि संघ (RSS) एक सांस्कृतिक संस्था है और स्कूल समय के बाद सामाजिक कार्यों/संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों में भाग लेना किसी कर्मचारी के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं है। उन्होंने कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए निलंबन वापस लेने की मांग की है।
  • राज्य सरकार का रुख: राज्य सरकार और शिक्षा विभाग का कहना है कि यह नियम सभी लोक सेवकों पर समान रूप से लागू होते हैं और सरकारी तंत्र की तटस्थता बनाए रखने के लिए आचार संहिता का कड़ा पालन अनिवार्य है।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: यादगीर में शिक्षकों को निलंबित क्यों किया गया?
उत्तर: शिक्षकों ने वर्ष 2025 में आयोजित आरएसएस के पथ संचलन (Route March) में भाग लिया था, जिसे शिक्षा विभाग ने कर्नाटक सिविल सेवा (आचरण) नियम, 2021 का उल्लंघन माना है।
Q2: निलंबित शिक्षकों के क्या नाम हैं?
उत्तर: निलंबित शिक्षकों के नाम गुरुराज जोशी (सहायक शिक्षक, हुंसगी) और अन्ना साहेब देशमुख (प्रधान शिक्षक, कुप्पी) हैं।
Q3: शिक्षकों ने अपने जवाब में क्या सफाई दी?
उत्तर: शिक्षकों का कहना था कि कार्यक्रम स्कूल के वर्किंग आवर्स (कामकाजी समय) के बाहर था और उन्होंने इसे राजनीतिक के बजाय सांस्कृतिक कार्यक्रम के रूप में देखा था।
Q4: निलंबन के बाद अब आगे क्या प्रक्रिया होगी?
उत्तर: दोनों शिक्षकों के खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Enquiry) चलेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि निलंबन रद्द होगा या आगे कोई अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख मीडिया रिपोर्ट्स और आधिकारिक बयानों के आधार पर केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है।
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