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बिहार की राजनीति में बड़ा फेरबदल: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिया इस्तीफा, अब दिल्ली की ओर कदम

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पटना | सोमवार, 30 मार्च 2026

बिहार की राजनीति के दिग्गज नेता और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार (30 मार्च) को राज्य विधान परिषद की सदस्यता से अपना औपचारिक इस्तीफा सौंप दिया। जदयू एमएलसी संजय गांधी ने मुख्यमंत्री का इस्तीफा पत्र परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को सौंपा।

यह कदम पूरी तरह से संवैधानिक था। Prohibition of Simultaneous Membership Rules (1950) के तहत, यदि कोई व्यक्ति संसद के किसी सदन (राज्यसभा) के लिए चुना जाता है, तो उसे 14 दिनों के भीतर अपनी राज्य विधानमंडल की सीट खाली करनी होती है। नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे, जिसकी समय सीमा आज समाप्त हो रही थी।

चारों सदनों के सदस्य: एक दुर्लभ कीर्तिमान

राज्यसभा में प्रवेश के साथ ही नीतीश कुमार भारतीय राजनीति के उन विरले नेताओं में शामिल हो गए हैं जिन्होंने लोकतंत्र के चारों स्तंभों (सदनों) में अपनी सेवा दी है:

  1. बिहार विधानसभा: 1985 में पहली बार हरनौत से विधायक।

  2. लोकसभा: 1989 से लगातार कई बार सांसद और केंद्रीय मंत्री।

  3. बिहार विधान परिषद: 2006 से अब तक (मुख्यमंत्री रहते हुए)।

  4. राज्यसभा: 10 अप्रैल 2026 को शपथ लेने के साथ नई पारी की शुरुआत।

बिहार का अगला ‘कप्तान’ कौन? नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट

नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ ही 1, अणे मार्ग (मुख्यमंत्री आवास) के नए उत्तराधिकारी को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, तकनीकी रूप से अनुच्छेद 164(4) के तहत वे बिना किसी सदन के सदस्य रहे अगले 6 महीने तक मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं, लेकिन माना जा रहा है कि अप्रैल के मध्य तक बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है।

संभावित नाम:

  • सम्राट चौधरी: वर्तमान उपमुख्यमंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता, जिन्हें नीतीश कुमार ने हाल ही में ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान अपना संकेत दिया था।

  • निशांत कुमार: नीतीश कुमार के बेटे, जिनके सक्रिय राजनीति में आने और पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की चर्चा हालिया पोस्टरों के बाद तेज है।

नीतीश कुमार की विरासत: 20 साल का ‘सुशासन’

2005 से बिहार की कमान संभालने वाले नीतीश कुमार ने राज्य की छवि बदलने में बड़ी भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल के ये फैसले मील का पत्थर माने जाते हैं:

  • साइकिल और पोशाक योजना: जिसने राज्य में महिला साक्षरता की तस्वीर बदली।

  • शराबबंदी (2016): समाज सुधार की दिशा में एक साहसिक, हालांकि विवादित फैसला।

  • महिला आरक्षण: पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50% आरक्षण देने वाला बिहार पहला राज्य बना।

“मेरा बिहार के लोगों से रिश्ता अटूट है। राज्यसभा जाना मेरी व्यक्तिगत राजनीतिक इच्छा की पूर्ति है, लेकिन राज्य के विकास के लिए मेरा मार्गदर्शन हमेशा उपलब्ध रहेगा।”

नीतीश कुमार (नामांकन के दौरान दिया गया बयान)

मुख्य बिंदु:

  • नीतीश कुमार ने बिहार विधान परिषद की सदस्यता छोड़ी।

  • 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए थे मुख्यमंत्री।

  • संवैधानिक बाध्यता के चलते 14 दिनों के भीतर देना था इस्तीफा।

  • बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस बरकरार; सम्राट चौधरी और निशांत कुमार के नाम चर्चा में।

निष्कर्ष:

10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका (संभवतः केंद्रीय मंत्रिमंडल) में नजर आ सकते हैं। वहीं, बिहार में सत्ता के हस्तांतरण की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में मानी जा रही है।

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