लखनऊ । शनिवार, 30 मई 2026
उत्तर प्रदेश के आम नागरिकों और व्यापारियों के लिए भीषण गर्मी के इस दौर में एक बेहद चिंताजनक खबर आई है। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने बिजली उपभोक्ताओं पर 10 फीसदी ईंधन अधिभार शुल्क (Fuel Surcharge Adjustment) लगाने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। यह वृद्धि अब तक के इतिहास में की गई सबसे बड़ी बढ़ोतरी है, जिसकी सीधी मार आम जनता के मासिक बजट पर पड़ने वाली है।
नियामक मामलों की इकाई (Regulatory Affairs Unit) के मुख्य अभियंता पंकज सक्सेना द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस बढ़े हुए अधिभार की शत-प्रतिशत वसूली जून 2026 के बिजली बिल के माध्यम से की जाएगी। आइए इस खबर से जुड़ी बारीकियों और आपके जरूरी सुधारों को आसान शब्दों में समझते हैं।
क्या सचमुच बदल गई हैं बिजली की दरें?
यहाँ एक बड़ा तकनीकी सुधार और स्पष्टीकरण समझना बेहद जरूरी है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) और UPPCL ने स्पष्ट किया है कि बिजली की मूल दरों (Base Tariff) में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि प्रति यूनिट जो फिक्स रेट तय था, वह वही रहेगा। लेकिन, अंतिम बिलिंग राशि में 10% का इजाफा सिर्फ ईंधन अधिभार यानी FPPAS के तौर पर जुड़कर आएगा।
आमतौर पर यह सरचार्ज केवल 1 से 2 प्रतिशत ही रहता था, लेकिन मल्टी-ईयर टैरिफ (MYT) नियमावली, 2025 के कड़े प्रावधानों (क्लाज 16/4) के तहत इस बार इसे अधिकतम सीमा यानी 10% पर फिक्स कर दिया गया है।
क्या होता है ईंधन अधिभार (Fuel Surcharge Adjustment) और इसकी गणना कैसे हुई?
ईंधन अधिभार शुल्क, जिसे तकनीकी भाषा में Fuel and Power Purchase Adjustment Surcharge (FPPAS) कहा जाता है, बिजली उत्पादन की लागत में आने वाले उतार-चढ़ाव को संतुलित करने का एक माध्यम है।
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3 महीने का गैप नियम: नए नियमों के अनुसार, बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) द्वारा किसी एक महीने में खरीदी गई महंगी बिजली या कोयले/गैस के परिवहन में आई अतिरिक्त लागत को ठीक तीन महीने बाद (n-3rd Month) उपभोक्ताओं से वसूला जाता है।
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मार्च का बोझ जून में: UPPCL के मुताबिक, मार्च 2026 के महीने में वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में अस्थिरता और महंगी दर पर बिजली की अतिरिक्त खरीद की गई थी। इसी बढ़े हुए खर्च को रिकवर करने के लिए जून के बिलिंग चक्र में 10% की यह रिकॉर्ड वसूली की जा रही है।
आपकी जेब पर कितना बढ़ेगा बोझ?
चूंकि यह अधिभार सीधे प्रतिशत (Percentage) पर काम करता है, इसलिए इसका असर हर उपभोक्ता के उपभोग के अनुसार अलग-अलग होगा। इसे हम नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझ सकते हैं:
| पुराना संभावित बिल (रुपये में) | 10% अतिरिक्त ईंधन अधिभार (रुपये में) | जून 2026 का कुल बिल (रुपये में) |
| ₹100 | ₹10 | ₹110 |
| ₹500 | ₹50 | ₹550 |
| ₹1,000 | ₹100 | ₹1,100 |
| ₹5,000 | ₹500 | ₹5,500 |
| ₹10,000 | ₹1,000 | ₹11,000 |
भीषण गर्मी में दोहरी मार और उपभोक्ता परिषद का विरोध
उत्तर प्रदेश में इस वक्त पारा 45 डिग्री के पार जा रहा है। घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में एसी (AC), कूलर और वाटर पंप का इस्तेमाल चरम पर है, जिससे लोगों का बिजली उपभोग पहले ही सामान्य से दोगुना हो चुका है। ऐसे में कुल बिल पर अतिरिक्त 10% का यह टैक्स घरेलू और कुटीर उद्योगों के मंथली बजट को पूरी तरह बिगाड़ सकता है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। उपभोक्ता परिषद का कहना है कि पूर्व में जब बिजली कंपनियों के पास उपभोक्ताओं का अधिशेष (Surplus Money) जमा है, तो इस प्रकार का भारी अधिभार पूरी तरह अनुचित है। उपभोक्ता परिषद द्वारा इस ऐतिहासिक वृद्धि के खिलाफ नियामक आयोग में पुनर्विचार याचिका दायर करने की भी तैयारी की जा रही है।
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