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बोले बदरुद्दीन अजमल: ‘ज्यादा बच्चे पैदा करने वालों को इनाम और सुविधाएं दे सरकार’

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एआईयूडीएफ (AIUDF) प्रमुख मौलाना बदरुद्दीन अजमल बोलते हुए।

गुवाहाटी । सोमवार, 22 जून 2026

असम विधानसभा चुनाव 2026 के बाद राज्य की राजनीति में जनसंख्या और डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रमुख मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने राज्य की घटती जन्मदर पर चिंता जताते हुए एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी गलियारों में बहस छेड़ दी है।

असम में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव 2026 के बाद अब जनसंख्या और डेमोग्राफी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के अध्यक्ष मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने असम की घटती जनसंख्या विकास दर (Population Growth Rate) पर गहरी चिंता व्यक्त की है। अजमल ने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की है कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से लें और ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले परिवारों को प्रोत्साहित करें।

गुवाहाटी में मीडिया से बात करते हुए एआईयूडीएफ (AIUDF) प्रमुख ने कहा कि सरकार को एक ऐसी नीति (Pronatalist Policy) बनानी चाहिए जिसके तहत अधिक बच्चों वाले परिवारों को न केवल वित्तीय मदद (आर्थिक इनाम) दी जाए, बल्कि उनके बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएं।

‘कम बच्चे होने से समाज पर बढ़ेगा बोझ’

अजमल ने अपने इस अजीबोगरीब और लीक से हटकर दिए गए बयान के पीछे कुछ सामाजिक और आर्थिक तर्क भी सामने रखे। उनका कहना है कि:

  • श्रम संकट (Labor Shortage): यदि जन्मदर इसी तरह गिरती रही तो आने वाले समय में राज्य में काम करने वाली उम्र के युवाओं (Working-age population) की भारी कमी हो जाएगी।

  • बुजुर्गों की देखभाल: कम युवा होने के कारण समाज में बुजुर्गों की संख्या का अनुपात बढ़ जाएगा, जिससे उनकी देखभाल और सामाजिक सुरक्षा का जिम्मा बेहद कम लोगों पर आ जाएगा।

  • खाली होंगे स्कूल-कॉलेज: उन्होंने यह भी अंदेशा जताया कि आबादी कम होने से आने वाले समय में शिक्षण संस्थान खाली होने लगेंगे और राज्य का आर्थिक चक्र प्रभावित होगा।

मौलाना बदरुद्दीन अजमल का कहना है कि यह स्थिति केवल किसी एक समुदाय की नहीं बल्कि असम के कई इलाकों में मुस्लिम समुदाय सहित विभिन्न वर्गों में देखी जा रही है।

तथ्यात्मक सुधार और 2026 का राजनीतिक संदर्भ (Fact-Check & Political Context)

इस खबर को पूरी सटीकता के साथ समझने के लिए कुछ हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और तथ्यों पर ध्यान देना जरूरी है:

  1. विधायक के तौर पर वापसी: मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने साल 2024 के लोकसभा चुनाव में धुबरी सीट से मिली हार के बाद अप्रैल-मई 2026 में हुए असम विधानसभा चुनाव में जोरदार वापसी की है। उन्होंने नवनिर्मित बिन्नाकांडी (Binnakandi) विधानसभा सीट से 34,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की है। हालांकि, उनकी पार्टी AIUDF इस चुनाव में केवल 2 सीटों पर ही सिमट गई।

  2. असम सरकार की नीति से टकराव: असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार लगातार जनसंख्या नियंत्रण और ‘टू-चाइल्ड पॉलिसी’ (दो बच्चों की नीति) की वकालत करती रही है, जिसके तहत दो से अधिक बच्चों वाले माता-पिता को सरकारी नौकरियों और कुछ चुनिंदा कल्याणकारी योजनाओं से बाहर रखने का प्रावधान है। अजमल का यह बयान सीधे तौर पर सरकार की इस नीति का विरोध है।

अजमल के बयान पर क्यों शुरू हुआ विवाद?

अजमल के इस बयान को भारत के संदर्भ में अव्यावहारिक माना जा रहा है। आलोचकों का तर्क है कि भारत और असम जैसे राज्यों में जहां सीमित प्राकृतिक और आर्थिक संसाधनों पर पहले से ही अत्यधिक दबाव है, वहां ‘प्रोनैटलिस्ट’ (आबादी बढ़ाने वाली) नीतियां लागू करना समझदारी नहीं है। ऐसी नीतियां आमतौर पर जापान, दक्षिण कोरिया या कुछ यूरोपीय देशों में अपनाई जाती हैं जहां आबादी नकारात्मक (Negative Growth) में जा चुकी है।

असम की राजनीति में जनसांख्यिकी (Demography) और नागरिकता हमेशा से बेहद संवेदनशील मुद्दे रहे हैं। ऐसे में अजमल के इस ताजा बयान के बाद सत्तापक्ष और विपक्षी दलों के बीच जुबानी जंग और तेज होना तय माना जा रहा है।

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