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भारतीय शेयर बाजार में कोहराम: निवेशकों के डूबे ₹12 लाख करोड़, जानें क्या हैं गिरावट के 5 बड़े कारण

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई।मंगलवार, 12 मई 2026

भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन ‘ब्लैक ट्यूसडे’ साबित हुआ। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच दलाल स्ट्रीट पर बिकवाली का ऐसा सैलाब आया कि प्रमुख सूचकांक करीब 2% तक टूट गए। सेंसेक्स में 1,456 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 23,400 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसलकर बंद हुआ।

बाजार का ताजा हाल (Latest Figures)

आज के कारोबार के अंत में बाजार की स्थिति कुछ इस प्रकार रही:

  • BSE सेंसेक्स: 74,559.24 पर बंद (1,456.04 अंक या 1.92% की गिरावट)

  • NSE निफ्टी 50: 23,379.55 पर बंद (436.30 अंक या 1.83% नीचे)

  • निफ्टी बैंक: 53,555.20 पर बंद (884.70 अंक की कमजोरी)

गिरावट के पीछे की ‘इनसाइड स्टोरी’ (संशोधित और नवीनतम जानकारी)

प्रारंभिक रिपोर्टों के अलावा, बाजार में आई इस सुनामी के पीछे कुछ गहरे तकनीकी और वैश्विक कारण रहे हैं:

  1. अमेरिका-ईरान ‘सीजफायर’ संकट: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ संघर्ष विराम अब “लाइफ सपोर्ट” पर है, जिससे युद्ध की आशंका और बढ़ गई है।

  2. कच्चे तेल का $107 का स्तर: ब्रेंट क्रूड की कीमतें $107 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। भारत के लिए यह दोहरा झटका है—एक तरफ बढ़ती महंगाई और दूसरी तरफ चालू खाता घाटा (CAD) का खतरा।

  3. रुपये का ऐतिहासिक अवसान: भारतीय रुपया आज अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.63 के अब तक के सबसे निचले स्तर (Record Low) पर बंद हुआ।

  4. OpenAI का ‘AI-टेक’ धमाका: आईटी शेयरों में गिरावट की एक बड़ी वजह OpenAI द्वारा एआई-आधारित तकनीकी सेवाओं में विस्तार की घोषणा भी रही, जिससे भारतीय आईटी दिग्गजों जैसे TCS और Infosys के भविष्य के बिजनेस मॉडल पर चिंता बढ़ गई है।

  5. FII की आक्रामक बिकवाली: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने सोमवार को ही ₹8,437 करोड़ से अधिक के शेयर बेचे थे, जिसका सिलसिला आज भी जारी रहा।

विशेषज्ञों की राय

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक मोर्चे पर शांति नहीं होती, तब तक उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। निवेशकों को वर्तमान में लंबी अवधि के मजबूत शेयरों (Large Cap) में बने रहने और अत्यधिक जोखिम भरे मिडकैप-स्मॉलकैप शेयरों से बचने की सलाह दी जाती है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।