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अल-बदर कमांडर हमजा बुरहान के जनाजे में जुटे बड़े आतंकी, हथियारों के साए में हुआ अंतिम संस्कार

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मुजफ्फराबाद | शनिवार, 23 मई 2026

वर्ष 2019 के भीषण पुलवामा आत्मघाती हमले के मास्टरमाइंड से जुड़े प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘अल-बदर’ के शीर्ष कमांडर हमजा बुरहान की हत्या के बाद पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में सक्रिय आतंकी नेटवर्क्स के बीच भारी हड़कंप मच गया है। उसकी मौत के बाद इस्लामाबाद में हुए नमाज-ए-जनाजा (अंतिम संस्कार) के दौरान आतंकी संगठनों के बीच का खौफ साफ देखने को मिला।

इस जनाजे में हिजबुल मुजाहिद्दीन के प्रमुख सैयद सलाउद्दीन और अल-बद्र प्रमुख बख्त जमीन खान सहित कई बड़े और वांटेड आतंकवादी शामिल हुए।

हथियारों के साए में अंतिम संस्कार: अज्ञात हमलावरों का बढ़ा डर

खुफिया सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमजा बुरहान को इस्लामाबाद (फातिमा स्कूल के पास) में दफनाया गया। उसके जनाजे के दौरान सुरक्षा के ऐसे कड़े इंतजाम थे जो आम तौर पर किसी आतंकी के लिए नहीं देखे जाते। मौके पर मौजूद आतंकी AK-47 और अन्य अत्याधुनिक हथियारों से पूरी तरह लैस थे।

सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि जनाजे में हथियारों का यह खुला प्रदर्शन और अभूतपूर्व सुरक्षा घेरा यह साफ संकेत देता है कि पाकिस्तान में छिपे आतंकियों के भीतर ‘अज्ञात हमलावरों’ (Unknown Gunmen) का डर किस कदर बैठ चुका है। पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान और PoK के सुरक्षित ठिकानों में घुसकर कई बड़े भारत-विरोधी आतंकियों को निशाना बनाया गया है, जिससे उनका पूरा नेटवर्क डरा हुआ है।

मुजफ्फराबाद में कैसे हुआ हमजा बुरहान का खात्मा?

गुरुवार (21 मई, 2026) को PoK के मुजफ्फराबाद (गोजरा इलाके में AIMS कॉलेज/स्कूल के बाहर) अज्ञात बाइक सवार हमलावरों ने हमजा बुरहान को निशाना बनाया। हमलावरों ने बेहद करीब से उस पर कई राउंड गोलियां बरसाईं, जिनमें से तीन गोलियां सीधे उसके सिर में लगीं। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

नवीनतम अपडेट : शुरुआती दावों के विपरीत, हमजा बुरहान वहां कोई साधारण जीवन नहीं जी रहा था। वह मुजफ्फराबाद के चीला बांदी इलाके में ISI द्वारा दी गई कमांडो सुरक्षा, बुलेटप्रूफ गाड़ी और एस्कॉर्ट वाहनों के साथ रहता था। पहचान छिपाने के लिए उसने वहां एक प्राइवेट कॉलेज के ‘प्रिंसिपल’ (शिक्षक) का छद्म रूप धारण कर रखा था, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी आतंकी गतिविधियों पर पर्दा डाला जा सके। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस हत्या के पीछे पैसों के विवाद को लेकर स्थानीय हिटमैन का हाथ होने की भी आशंका जताई जा रही है। मौके से भाग रहे एक संदिग्ध (अब्दुल्ला कमाल) को स्थानीय लोगों ने पकड़कर पुलिस के हवाले किया है।

कौन था हमजा बुरहान उर्फ ‘डॉक्टर’?

हमजा बुरहान का असली नाम अरजमंद गुलजार डार था और आतंकी हलकों में उसे “डॉक्टर” के नाम से भी जाना जाता था।

  • मूल निवासी: वह मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा (खरबतपोरा) इलाके का निवासी था।

  • MBBS की पढ़ाई और आतंक का रास्ता: वह एक पढ़ा-लिखा युवा था जिसने मेडिकल (MBBS) की पढ़ाई की थी। इसी वजह से उसे ‘डॉक्टर’ का उपनाम मिला।

  • पाकिस्तान पलायन: करीब 7 साल पहले (वर्ष 2017 में) वह उच्च शिक्षा के बहाने वैध दस्तावेजों के जरिए पाकिस्तान गया था, लेकिन वहां जाकर उसने आतंकी संगठन ‘अल-बदर’ का हाथ थाम लिया। अपनी आक्रामक सोच और बुरहान वानी व जाकिर मूसा जैसे आतंकियों से करीबी संपर्कों के चलते वह जल्द ही अल-बदर का शीर्ष ऑपरेशनल कमांडर बन गया।

भारत विरोधी नेटवर्क और पुलवामा हमले में भूमिका

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल इस आतंकी को भारत सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) ने वर्ष 2022 में UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत आधिकारिक तौर पर आतंकवादी घोषित किया था।

जंच एजेंसियों के अनुसार, भारत विरोधी नेटवर्क में उसकी भूमिका बेहद घातक थी:

  1. पुलवामा हमला (2019): उसने 40 सीआरपीएफ जवानों की शहादत वाले पुलवामा हमले के निष्पादनकर्ताओं को विस्फोटक, ग्रेनेड और लॉजिस्टिक्स की सप्लाई सुनिश्चित की थी और हमले के रूट मैप को तैयार करने में मदद की थी। इसके बाद नवंबर 2020 में पुलवामा में हुए एक और ग्रेनेड हमले में भी उसका हाथ था।

  2. आतंकी लॉन्चिंग पैड्स: वह PoK में कम से कम 7 आतंकी लॉन्चिंग पैड्स का प्रभारी था, जहां भारतीय सीमा में घुसपैठ के लिए आतंकियों को ट्रेनिंग और हथियार दिए जाते थे।

  3. युवाओं का ब्रेनवॉश: वह सोशल मीडिया पर प्रोपेगैंडा वीडियो जारी कर कश्मीर के स्थानीय युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने और उन्हें आतंकी संगठनों में भर्ती करने का मुख्य जरिया (रिक्रूटर) बना हुआ था।

हमजा बुरहान का इस तरह मारा जाना सीमा पार से चल रहे भारत-विरोधी आतंकी ढांचे और विशेषकर अल-बदर संगठन के लिए एक अपूरणीय क्षति और बहुत बड़ा झटका है।

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