बेंगलुरु । शनिवार, 30 मई 2026
कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद की रेस पर तो विराम लग गया है, लेकिन उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) की कुर्सी को लेकर अंदरूनी कलह और तेज हो गई है। 30 मई 2026 को कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक में आधिकारिक तौर पर डीके शिवकुमार (D.K. Shivakumar) को नया नेता चुन लिया गया है और उनका शपथ ग्रहण समारोह 3 जून 2026 को होना तय हुआ है। लेकिन इस ताजपोशी के तुरंत बाद राज्य के दो सबसे प्रभावशाली वोट बैंकों—दलित और लिंगायत—ने सरकार में अपनी हिस्सेदारी के लिए कांग्रेस हाईकमान पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
दोनों ही समुदायों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई, तो आगामी चुनावों में कांग्रेस को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
केम्पेगौड़ा एयरपोर्ट पर दलितों का शक्ति प्रदर्शन: केएच मुनियप्पा के लिए उठी मांग
शनिवार को बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उस समय राजनीतिक हलचल बढ़ गई, जब मादारा महासभा और विभिन्न दलित संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ता वहां इकट्ठा हो गए। कार्यकर्ताओं ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता के. एच. मुनियप्पा को डिप्टी सीएम बनाने की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की और पोस्टर लहराए।
इस दौरान कार्यकर्ताओं ने एआईसीसी (AICC) कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला को एक ज्ञापन (मेमोरेंडम) भी सौंपा। प्रदर्शनकारी नेताओं का कहना है कि राज्य में अच्छी-खासी आबादी होने के बावजूद मादिगा उप-समुदाय को हमेशा हाशिए पर रखा गया है। उन्हें आज तक न तो मुख्यमंत्री, न डिप्टी सीएम और न ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (KPCC प्रमुख) का पद मिला है। दलित नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा, “अगर कांग्रेस हाईकमान हमारी हिस्सेदारी तय नहीं करता है, तो हमें पार्टी को सबक सिखाना पड़ेगा।”
लिंगायत संतों का खुला ऐलान: ईश्वर खंदरे को मिले डिप्टी सीएम का पद
दलितों के इस शक्ति प्रदर्शन के बीच कर्नाटक की राजनीति के सबसे ताकतवर लिंगायत समुदाय ने भी अपनी दावेदारी ठोक दी है। लिंगायत संत गुरु बसव पट्टदेवरू और उनके समर्थकों ने सीनियर कांग्रेस नेता ईश्वर खंदरे को डिप्टी सीएम बनाने की मांग उठाई है।
गुरु जी ने कांग्रेस नेतृत्व को आगाह करते हुए कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में लिंगायत समुदाय ने एकजुट होकर कांग्रेस का साथ दिया था, जिसके दम पर पार्टी सत्ता में आई। यदि इस बार ईश्वर खंदरे को उपमुख्यमंत्री बनाकर समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया, तो लिंगायत समाज अगले चुनाव में कांग्रेस को पूरी तरह नकार देगा।
तथ्यों का विश्लेषण (Fact-Check)
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस के सामने ‘एक अनार सौ बीमार’ वाली स्थिति पैदा हो गई है:
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प्रतिनिधित्व का संतुलन: डीके शिवकुमार (जो वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं) के मुख्यमंत्री बनने के बाद, कांग्रेस को जातिगत संतुलन साधने के लिए गैर-वोक्कालिगा चेहरों को आगे लाना ही होगा।
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हाईकमान की चुनौती: कर्नाटक में सिद्धासरमैया और डीके शिवकुमार के बीच की खींचतान के बाद यह दूसरा बड़ा संकट है। अगर पार्टी केवल एक डिप्टी सीएम बनाती है, तो दूसरा नाराज होगा। और यदि वह कई डिप्टी सीएम (Multiple Deputy CMs) का फॉर्मूला अपनाती है, तो सरकार के भीतर शक्ति के कई केंद्र बन जाएंगे।
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वोट बैंक खिसकने का डर: दलित (विशेषकर मादिगा) और लिंगायत दोनों ही ऐसे वर्ग हैं जो किसी भी दल का खेल बनाने या बिगाड़ने का माद्दा रखते हैं।
3 जून को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह से पहले रणदीप सिंह सुरजेवाला और कांग्रेस आलाकमान इन दोनों गुटों को शांत करने के लिए किसी बीच के रास्ते या कैबिनेट में बड़े मंत्रालयों के फॉर्मूले पर विचार कर सकते हैं।
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