नई दिल्ली । सोमवार, 8 जून 2026
भारतीय राजनीति के पटल पर विपक्षी एकता के प्रतीक के रूप में उभरा ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन क्या आंतरिक कलह और अविश्वास की भेंट चढ़ रहा है? यह सवाल एक बार फिर देश की राजधानी दिल्ली की गलियों से गूंज उठा है। आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती ने कांग्रेस के नेतृत्व और उसकी गठबंधन नीतियों पर बेहद तीखे और गंभीर आरोप लगाए हैं। भारती का साफ कहना है कि जब तक कांग्रेस इस गठबंधन की कमान संभालेगी, तब तक विपक्ष के इस मोर्चे का कोई भविष्य नहीं है।
आइए समझते हैं कि सोमनाथ भारती के इस बयान के पीछे की असली राजनीतिक कहानी क्या है और ‘इंडिया’ गठबंधन के भीतर चल रही यह खींचतान भारतीय लोकतंत्र को किस दिशा में ले जा रही है।
1. गठबंधन धर्म और ‘पर्दे के पीछे’ का खेल
सोमनाथ भारती ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि किसी भी राजनीतिक गठबंधन का एक बुनियादी ‘धर्म’ होता है—”जो नीति अंदर तय हो, वही बाहर भी दिखनी चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि आम जनता के सामने तो कांग्रेस खुद को गठबंधन के प्रति समर्पित दिखाती रही, लेकिन पर्दे के पीछे उसकी साठगांठ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ नजर आ रही थी।
2. दिल्ली का 4-3 फॉर्मूला और राहुल गांधी पर सवाल
भारती ने लोकसभा चुनाव के दौरान दिल्ली में हुए सीट-बंटवारे का उदाहरण देते हुए कांग्रेस के दोहरे मापदंडों को उजागर किया। दिल्ली में ‘आप’ और कांग्रेस के बीच 4-3 का फॉर्मूला तय हुआ था।
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अरविंद केजरीवाल का समर्पण: ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस के हिस्से आई 3 सीटों पर जाकर पूरी ईमानदारी से प्रचार किया और उनके लिए वोट मांगे।
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कांग्रेस की बेरुखी: दूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी के हिस्से वाली 4 सीटों पर राहुल गांधी समेत कांग्रेस का कोई भी शीर्ष नेता ‘आप’ उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार करने नहीं पहुंचा।
“जब चुनाव में एक-दूसरे का साथ ही नहीं देना था, तो यह कैसा गठबंधन है? दिल्ली विधानसभा चुनाव में शून्य सीटें जीतने के बाद भी कांग्रेस का यह कहना कि ‘आम आदमी पार्टी हार गई’, उनके अहंकार और गठबंधन धर्म की नासमझी का सबसे बड़ा प्रमाण है।”
— सोमनाथ भारती, नेता, आम आदमी पार्टी
3. क्षेत्रीय दलों को खत्म करने की क्रोनोलॉजी?
सोमनाथ भारती का सबसे गंभीर आरोप यह है कि कांग्रेस की नीति देश में बहुदलीय व्यवस्था को समाप्त करने की है। उनका दावा है कि कांग्रेस चाहती है कि भारत की राजनीति केवल दो ध्रुवों—भाजपा और कांग्रेस—के बीच सिमटकर रह जाए।
| सोमनाथ भारती के आरोपों का विश्लेषण |
| रणनीति: जहां भी क्षेत्रीय पार्टियां (Regional Parties) मजबूत हैं, कांग्रेस उन्हें कमजोर करने की कोशिश करती है। |
| लक्ष्य: राजनीति को द्वि-ध्रुवीय (Two-Party System) बनाना ताकि जनता के पास बारी-बारी से केवल इन दो को ही चुनने का विकल्प बचे। |
| तरीका: विपक्षी दलों का खुलकर समर्थन करने के बजाय परोक्ष (अप्रत्यक्ष) रूप से विरोधी ताकतों को लाभ पहुंचाना। |
इस संदर्भ में उन्होंने न केवल दिल्ली बल्कि पश्चिम बंगाल का भी उदाहरण दिया, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के साथ भी कांग्रेस का रवैया बेहद सहयोगात्मक नहीं रहा।
निष्कर्ष: क्या बिखर जाएगा ‘इंडिया’ ब्लॉक?
सोमनाथ भारती के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ‘इंडिया’ गठबंधन के भीतर अविश्वास की खाई बहुत गहरी हो चुकी है। राहुल गांधी जब भी ‘वोट चोरी’ या लोकतंत्र बचाने की बात करते हैं, तो वे दिल्ली के मुद्दों को छोड़ देते हैं, जो ‘आप’ नेताओं को नागवार गुजरता है।
भविष्य में इस गठबंधन का स्वरूप क्या होगा, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन क्षेत्रीय दलों के मन में कांग्रेस के प्रति बढ़ता यह असंतोष 2026 और आने वाले चुनावों में भारतीय राजनीति की पूरी दिशा बदल सकता है।
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