जयपुर । सोमवार, 22 जून 2026
राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों और राजधानी जयपुर में अवैध निर्माणों एवं अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन के हालिया ‘बुलडोजर एक्शन’ ने राज्य में एक बड़ा कानूनी और राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। जयपुर, बाड़मेर और जैसलमेर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में हुई इन कार्रवाइयों के बाद अल्पसंख्यक समुदाय और राजस्थान वक्फ बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान वक्फ बोर्ड ने राज्य के सभी मस्जिद और मदरसा प्रबंधन समितियों के लिए एक नई गाइडलाइन जारी कर दी है।
जयपुर में नूरानी मस्जिद ध्वस्तीकरण से भड़का विवाद
इस पूरे विवाद को हवा तब मिली जब जयपुर के नंदपुरी (मालवीय नगर-जगतपुरा रोड) इलाके में स्थित करीब 45 साल पुरानी (1981 में निर्मित) नूरानी मस्जिद के ढांचे को जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) द्वारा अवैध निर्माण बताते हुए जमींदोज कर दिया गया। प्रशासन का तर्क है कि यह कार्रवाई 80 फीट चौड़े रोड कॉरिडोर को साफ करने और सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत की गई है।
इस कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जयपुर के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित करनी पड़ीं और करीब 3,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। वक्फ बोर्ड और स्थानीय प्रबंधन समितियों का दावा है कि उनके पास इस जमीन के वैध दस्तावेज मौजूद थे, लेकिन इसके बावजूद दशकों पुराने धार्मिक स्थल को अचानक नोटिस देकर ढहा दिया गया, जिससे समुदाय में असुरक्षा की भावना बढ़ी है।
राजस्थान वक्फ बोर्ड की नई गाइडलाइन: क्या है रणनीति?
प्रशासनिक कार्रवाइयों और कथित ‘एकतरफा’ नोटिस प्रक्रिया का कानूनी रूप से मुकाबला करने के लिए राजस्थान वक्फ बोर्ड ने सभी मस्जिद और मदरसा प्रबंधन समितियों को निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:
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सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य (CCTV Mandate): सभी धार्मिक स्थलों, मस्जिदों और मदरसों के परिसर में तुरंत सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। इसका उद्देश्य किसी भी प्रशासनिक टीम के आगमन, नोटिस देने की प्रक्रिया या किसी भी तरह की कार्रवाई का पुख्ता डिजिटल रिकॉर्ड और सबूत सुरक्षित रखना है।
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समितियों में वकीलों की एंट्री: वक्फ बोर्ड ने सलाह दी है कि सभी स्थानीय प्रबंधन समितियों में स्थानीय वकीलों (Legal Experts) को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। इससे किसी भी नोटिस का कानूनी और तकनीकी रूप से तुरंत सही जवाब दिया जा सकेगा।
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रेवेन्यू रिकॉर्ड्स का डिजिटलीकरण: वक्फ बोर्ड अब सीमावर्ती और अन्य क्षेत्रों में मौजूद अपनी सभी संपत्तियों के रेवेन्यू रिकॉर्ड्स और दस्तावेजों की डिजिटल जांच करवा रहा है, ताकि सभी कागजात को समय रहते अपडेट रखा जा सके और अतिक्रमण के दावों को खारिज किया जा सके।
अशोक गहलोत ने उठाए सरकार पर सवाल, केंद्र से मांगा स्पष्टीकरण
इस संवेदनशील मुद्दे पर राजस्थान की राजनीति भी पूरी तरह गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की भजनलाल सरकार और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। गहलोत ने आरोप लगाया:
“सीमावर्ती इलाकों और राजधानी में जानबूझकर धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर कार्रवाई की जा रही है। जिन स्थानों पर लंबे समय से सांप्रदायिक सौहार्द बना हुआ था, वहां इस तरह के कदमों से तनाव बढ़ने की आशंका है। यह कार्रवाई हमारे सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित कर सकती है।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से इस पूरे घटनाक्रम पर तुरंत हस्तक्षेप करने, स्थिति को स्पष्ट करने और इस तरह की कार्रवाइयों पर रोक लगाने की मांग की है।
प्रशासन का पक्ष: ‘यह केवल अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई है’
दूसरी तरफ, जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) और स्थानीय जिला प्रशासनों ने सांप्रदायिक या चुनिंदा कार्रवाई के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। प्रशासनिक अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यह अभियान किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि पूरी तरह से ‘अवैध निर्माणों और सड़क सुरक्षा में बाधक अतिक्रमणों’ के खिलाफ है। नियमों के तहत पहले ही सूचना दी गई थी और तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए ही अवैध निर्माण हटाए गए हैं।
फिलहाल, इस प्रशासनिक कार्रवाई और वक्फ बोर्ड की जवाबी रणनीति ने राजस्थान में एक नए कानूनी और राजनीतिक टकराव को जन्म दे दिया है, जिसकी गूंज आने वाले दिनों में और तेज होने की उम्मीद है।
Matribhumisamachar


