नई दिल्ली । मंगलवार, 23 जून 2026
साल 2026 की शुरुआत (फरवरी-मार्च 2026) भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए काफी तनावपूर्ण रही। पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक व्यापार की लाइफलाइन कहे जाने वाले होर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) में सुरक्षा जोखिम चरम पर पहुंच गए थे।
इस संकट के दौरान लगभग 24 भारतीय व्यापारिक जहाज होर्मुज क्षेत्र में फंस गए थे, जिनमें से अधिकांश जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में खड़े थे। इन टैंकरों में भारत के कृषि और ऊर्जा क्षेत्र के लिए जीवन रक्षक माने जाने वाले सामान—कच्चा तेल, एलपीजी और उर्वरक लदे हुए थे।
कूटनीतिक प्रयासों के बाद, 17 जून, 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता होने के साथ ही इस संकट का समाधान हो गया है।
भारत आ रहे जहाजों और कार्गो का सटीक विवरण
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल के आधिकारिक बयान के अनुसार, होर्मुज के रास्ते से जहाजों की सुरक्षित निकासी शुरू हो चुकी है। न केवल फंसे हुए जहाज बाहर आ रहे हैं, बल्कि तीन भारतीय जहाज बाहर से होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में सुरक्षित प्रवेश भी कर चुके हैं।
वर्तमान में भारत की ओर बढ़ रहे 11 जहाजों का सांख्यिकीय विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
भारत आ रहे जहाजों का विवरण (जून 2026)
| जहाजों की संख्या और पंजीकरण | लदा हुआ मुख्य कार्गो (Cargo Material) | मात्रा / प्रभाव |
| 03 (भारतीय पंजीकृत) | कच्चा तेल (Crude Oil) | 2.85 लाख मीट्रिक टन |
| 01 (विदेशी पंजीकृत) | एलपीजी (LPG) | घरेलू गैस आपूर्ति में सुधार |
| 01 (विदेशी पंजीकृत) | कच्चा तेल (Crude Oil) | ऊर्जा भंडारण में वृद्धि |
| 06 (अन्य मालवाहक) | उर्वरक (Fertilizers) | खरीफ फसल सीजन के लिए राहत |
वर्तमान स्थिति: भारत के विभिन्न बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे इन जहाजों के अलावा 10 अन्य भारतीय जहाज अभी भी होर्मुज क्षेत्र में मौजूद हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के बाद इन्हें भी जल्द ही भारत के लिए रवाना कर दिया जाएगा।
भारत के लिए क्यों बेहद महत्वपूर्ण है होर्मुज जलमार्ग?
रणनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया का सबसे संवेदनशील ‘चेकपॉइंट’ माना जाता है। भारत की अर्थव्यवस्था के लिए इसकी अहमियत को इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:
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50% कच्चे तेल की निर्भरता: भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा इसी संकीर्ण जलमार्ग के रास्ते आयात करता है।
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मध्य पूर्व से जुड़ाव: इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत जैसे भारत के सबसे बड़े तेल आपूर्तिकर्ता देश इसी मार्ग का उपयोग करके खाड़ी से बाहर निकलते हैं।
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घरेलू बाजारों पर प्रभाव: इन जहाजों के भारत पहुंचने से देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें स्थिर होंगी और उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।
यद्यपि हाल के वर्षों में भारत ने रूस, अफ्रीका और अमेरिकी देशों से तेल खरीदकर अपने आयात स्रोतों में विविधता (Diversification) लाई है, फिर भी मध्य पूर्व की भौगोलिक निकटता के कारण होर्मुज जलमार्ग भारत की ऊर्जा संप्रभुता का मुख्य स्तंभ बना हुआ है।
मुख्य बिंदु (Quick Highlights):
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17 जून, 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते पर सहमति बनी।
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होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पश्चिमी हिस्से से व्यापारिक जहाजों का आवागमन तेजी से सामान्य हो रहा है।
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने पुष्टि की है कि 11 जहाज भारत के लिए रवाना हो चुके हैं।
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इन जहाजों में 2.85 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल, एलपीजी (LPG) और भारी मात्रा में उर्वरक (Fertilizers) शामिल हैं।
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